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image credit: mathrubhumi.com 🗣️ “मुस्लिम लड़कियां लाओ, नौकरी पाओ” — नफरत की जुबां और उससे उठता सवाल: कब तक अपमान बर्दाश्त करेंगे मुसलमान और दलित? उत्तर प्रदेश की एक जनसभा में दिए गए आपत्तिजनक बयान—”10 मुस्लिम लड़कियां लाओ और नौकरी पाओ”—ने सार्वजनिक जीवन में पनप रहे जहरीले वातावरण को उजागर किया है। बसपा सुप्रीमो मायावती की कड़ी निंदा और सख़्त कार्रवाई की मांग इसी भयावह संदर्भ में उठ रही है, जहाँ धार्मिक नफरत और सामाजिक विभाजन नेताओं की जुबान से सामान्य लगने लगे हैं। 💥 घृणा भाषण: सिर्फ शब्द नहीं, भयानक दुष्प्रभाव जनसभा में तालियों की गूँज के बीच दिए…

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🗳️ 47 लाख नाम हटे, अब 12 राज्य निशाने पर — क्या एसआईआर अगला एनआरसी बन रहा है? देशभर में मतदाता सूची के “विशेष गहन पुनरीक्षण” (Special Intensive Review – SIR) की घोषणा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चुनाव आयोग ने हाल ही में घोषणा की है कि यह प्रक्रिया अब 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगी, लेकिन असम को इससे बाहर रखा गया है। यह वही असम है, जहाँ नागरिकता और मतदाता सूचियों का सवाल पिछले एक दशक से सबसे विवादास्पद रहा है। आयोग का यह फैसला संदेह और आलोचना के केंद्र में…

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image credit : hindi.goodreturns.in 💰 अडानी के लिए एलआईसी की तिजोरी खुली: विदेशी बैंकों के पीछे हटने पर मोदी सरकार ने दिलवाए अरबों डॉलर भारत के आर्थिक-सियासी गलियारों में अडानी समूह का नाम हमेशा चर्चा के केंद्र में रहा है। हाल ही में, वॉशिंगटन पोस्ट की एक ताज़ा रिपोर्ट ने इस बहस को फिर से ज़िंदा कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने मई 2025 में एक योजना के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पैसों से अडानी समूह को 3.9 अरब डॉलर (करीब 32,000 करोड़ रुपये) का वित्तीय सहारा दिया। 🏛️…

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image credit : independentarabia.com ⚔️ पाकिस्तान बनाम अफ़ग़ानिस्तान: वार्ता नाकाम हुई तो ‘खुली जंग’ — क्या इस बार इस्लामाबाद सचमुच युद्ध के मुहाने पर है? पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ का यह बयान — “अगर बातचीत से मसले हल नहीं हुए तो अफ़ग़ानिस्तान के साथ खुली जंग छिड़ जाएगी” — दक्षिण एशिया की उस सीमा पर गूंजा है, जो दशकों से आतंक, अविश्वास और अधूरी शांति का प्रतीक बनी हुई है। बीबीसी उर्दू को दिए गए इस बयान में आसिफ़ ने कहा कि क़तर और तुर्की की मध्यस्थता में चल रही वार्ताओं से फिलहाल हिंसक घटनाएँ रुकी हैं, लेकिन…

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दिल्ली में छठ पूजा के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा शुरू किया गया ‘जिहादी-मुक्त दिल्ली’ और ‘सनातन प्रतिष्ठा स्टिकर’ अभियान अपने दावों में भले ही ‘शुद्धता’ और ‘सनातन परंपरा की रक्षा’ का नाम लेता हो, लेकिन इसका असली मकसद धार्मिक पहचान के आधार पर दुकानदारों को “शुद्ध” और “अशुद्ध” की श्रेणियों में बाँटकर आर्थिक और सामाजिक विभाजन को और तेज़ करना प्रतीत होता है। 🏷️ ‘सनातन प्रतिष्ठा स्टिकर’: धार्मिक वर्गीकरण का औजार विहिप के प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता के अनुसार, यह स्टिकर केवल उन्हीं दुकानों को दिया जाएगा जो “सत्यापित, पंजीकृत और सनातन मान्यताओं में आस्था रखने वाले”…

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मलेशिया दौरे ने एशिया में जिस राजनीतिक संदेश के साथ दस्तक दी थी, वह उसी दिन सड़कों पर बदल गया। राजधानी कुआलालंपुर में सैकड़ों लोग फ़लस्तीनी झंडे थामे यह नारा लगा रहे थे — “ट्रंप, तुम्हारा मलेशिया में स्वागत नहीं है।” यह दृश्य केवल एक राजनयिक दौरे के खिलाफ विरोध नहीं था, बल्कि एक प्रतीकात्मक राजनीतिक घोषणा थी—कि वाशिंगटन की नीतियों के खिलाफ एशियाई समाजों में गुस्सा अब सतह पर है। फ़लस्तीन, ट्रंप और मुस्लिम दुनिया की बेचैनी ट्रंप प्रशासन ने हाल के महीनों में इज़राइल के समर्थन में अडिग रुख अपनाया है। यही नीति…

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image source : freepressjournal.in दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के एक कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (ABVP) की पदाधिकारी द्वारा एक अध्यापक पर हमला करने का वीडियो सामने आने के बाद परिसर में तनाव का माहौल है। यह घटना केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सार्वजनिक जीवन में हिंसा की बढ़ती संस्कृति और परस्पर विश्वास की कमी को उजागर करती है। 🔎 हिंसा का संदर्भ और प्रासंगिकता लेखक अपूर्वानंद इस घटना को समझने के लिए कुछ अप्रासंगिक लेकिन प्रचलित तर्कों को खारिज करते हैं: प्रशासनिक भूमिका और अध्यापक की परेशानी 😠 छात्र राजनीति में आक्रामकता की संस्कृति परिसर में…

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भारत में जाति और धर्म की राजनीति नई नहीं है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में जिस तरह सामाजिक अत्याचारों का चरित्र बदला है, वह बेहद चिंताजनक है। पहले मुसलमानों पर निशाना साधा गया—मॉब लिंचिंग, बुलडोज़र न्याय, और हिजाब से लेकर हलाल तक हर प्रतीक पर हमला। और अब ऐसा लग रहा है कि भाजपा शासित राज्यों में दलित समुदाय नया निशाना बन चुका है। ताज़ा उदाहरण मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की दो वीभत्स घटनाएं हैं, जिन्होंने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। 🛑 मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश: जातीय क्रूरता का वीभत्स प्रदर्शन राज्यघटना का विवरणप्रशासनिक प्रतिक्रिया पर…

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source : x.com अमेरिका में बीते सप्ताहांत जो नज़ारा देखने को मिला, वह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं था—वह एक राजनीतिक भूचाल था। 19 अक्टूबर को जब लाखों लोग वॉशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क, शिकागो और मियामी की सड़कों पर “Democracy Not Monarchy” और “The Constitution Is Not Optional” के नारे लगाते नज़र आए, तो यह स्पष्ट संदेश था: अमेरिका में लोकतंत्र किसी राजा का नहीं, जनता का है—और जनता अब ट्रंप से नाराज़ है। 📢 70 लाख लोग, एक संदेश: ‘नो किंग्स’ सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, “No Kings Protest” में इस बार करीब 70 लाख लोगों ने भाग लिया—यह अमेरिका…

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image source : navbharattimes.indiatimes.com “लाड़की बहिन” योजना का लाभ भाजपा के 12 हज़ार “लाडक्या भाऊ ”को .महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई “मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना” का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण देना था, जिसके तहत 21 से 65 वर्ष की महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की सहायता मिलनी थी। लेकिन अब सामने आई रिपोर्टें बताती हैं कि यह योजना सरकारी तंत्र की लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण का एक बड़ा उदाहरण बन गई है। 👨‍👩‍👧‍👦 जब ‘बहनों’ की कतार में ‘भाई’ भी शामिल हो गए इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत न सिर्फ़…

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