Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

जौहर यूनिवर्सिटी पर फैसला सिर्फ़ एक इमारत का नहीं, देश के भविष्य का है

August 1, 2026

आंदोलन खत्म हुआ था या अब शुरू होगी दूसरी लड़ाई?

August 1, 2026

क्या शिक्षा मंत्रालय को नैतिक नेतृत्व चाहिए या सिर्फ़ राजनीतिक वफ़ादारी?

July 31, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • जौहर यूनिवर्सिटी पर फैसला सिर्फ़ एक इमारत का नहीं, देश के भविष्य का है
  • आंदोलन खत्म हुआ था या अब शुरू होगी दूसरी लड़ाई?
  • क्या शिक्षा मंत्रालय को नैतिक नेतृत्व चाहिए या सिर्फ़ राजनीतिक वफ़ादारी?
  • जब एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं… तो देश का नंबर-1 कैसे?
  • वक्फ की ज़मीन पर कब्ज़ा अब आसान नहीं! लातूर में भूमाफियाओं को वक्फ बोर्ड की खुली चेतावनी
  • अगर अदालतों के पास भी नागरिकों की चींख सुनने का समय नहीं, तो मजलूम आखिर जाएं कहां?
  • गुजरात में “कट्टरतावाद विरोधी पथक”की स्थापना…
  • मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Saturday, August 1
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»भारत

नेतन्याहू की तारीफ़ पर कांग्रेस का गुस्सा: क्या मोदी की विदेश नीति ‘संतुलन’ से ‘झुकाव’ में बदल रही है?

PM मोदी का ट्वीट बना विवाद: ग़ज़ा शांति समझौते पर नेतन्याहू की तारीफ़ से कांग्रेस ने उठाए सवाल
adminBy adminOctober 10, 2025 भारत No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

भूमिका: एक ट्वीट और शुरू हुई नई बहस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक ट्वीट ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। ग़ज़ा शांति समझौते के पहले चरण का स्वागत करते हुए पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना की और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के “सशक्त नेतृत्व” की तारीफ़ की। कांग्रेस ने इस बयान को “नैतिक रूप से आपत्तिजनक” और “भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति से विचलन” बताया है।

कांग्रेस का तर्क: ‘जनसंहार’ के बीच प्रशंसा क्यों?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा: “मोदी ने ग़ज़ा में नरसंहार करने वाले नेतन्याहू की प्रशंसा की है। यह शर्मनाक है और भारत की उस नीति के खिलाफ है, जो दशकों से फ़लस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र का समर्थन करती आई है।” जयराम रमेश ने याद दिलाया कि भारत ने नवंबर 1988 में फ़लस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी थी, और आज 150 से अधिक देश ऐसा कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने इसराइल के वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार और मानवाधिकार उल्लंघनों पर चुप्पी साध ली है, जो भारत की नैतिक स्थिति को कमजोर करती है।

मोदी का रुख: ‘शांति समझौते’ को सकारात्मक संकेत

प्रधानमंत्री मोदी का ट्वीट तकनीकी रूप से शांति प्रक्रिया का स्वागत करता है। उन्होंने लिखा: “हम राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना के पहले चरण पर हुए समझौते का स्वागत करते हैं। यह प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सशक्त नेतृत्व का भी प्रतीक है।” मोदी का यह बयान भारत की ‘दोस्ताना लेकिन व्यावहारिक’ विदेश नीति को दर्शाता है — जहाँ वे अमेरिका और इसराइल दोनों से सामरिक रिश्तों को मज़बूत करने की दिशा में आगे बढ़ते दिखते हैं। हालांकि, आलोचक कहते हैं कि यह ‘व्यावहारिकता’ भारत की “गुटनिरपेक्ष” नैतिक स्थिति को कमज़ोर कर रही है।

भारत की पारंपरिक नीति: फ़लस्तीन के साथ ऐतिहासिक एकजुटता

भारत दशकों तक फ़लस्तीन के आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता का सबसे मज़बूत समर्थक रहा है।

नेहरू युग में, भारत ने 1948 में इसराइल को मान्यता देने में देरी की थी ताकि अरब जगत से अपने संबंधों को संतुलित रख सके।

राजीव गांधी के समय में फ़लस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के नेता यासर अराफ़ात को भारत में ‘राज्य अतिथि’ का दर्जा मिला था।

1992 में भारत ने इसराइल से पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए, लेकिन तब भी उसने फ़लस्तीन के समर्थन की नीति नहीं छोड़ी थी।

लेकिन मोदी युग में भारत पहली बार सार्वजनिक रूप से इसराइल के साथ खड़ा दिखा, चाहे वह रक्षा समझौते हों, कृषि तकनीक या गाज़ा संकट के दौरान ‘दोनों पक्षों से संयम’ की अपील।

राजनीतिक विश्लेषण: भारत का संतुलन या झुकाव?

विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, मोदी की यह टिप्पणी एक ‘राजनयिक संकेत’ है — जो भारत की अमेरिका-इसराइल धुरी के साथ बढ़ती निकटता को दिखाती है। क्योंकि यह बयान ऐसे समय में आया है जब: ट्रंप की शांति योजना को अरब देशों ने “अधूरी और पक्षपाती” बताया है, और नेतन्याहू की छवि ग़ज़ा में हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों के प्रतीक के रूप में देखी जा रही है। इसलिए, मोदी का नेतन्याहू की तारीफ़ करना सिर्फ एक ट्वीट नहीं, बल्कि भारत की बदलती अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं का संकेत है।

घरेलू राजनीति का आयाम: विपक्ष का नैरेटिव

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस ट्वीट को लेकर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि: मोदी सरकार ने भारत की “नैतिक विदेश नीति” को ताक़ पर रख दिया है। और अब विदेश नीति में भी “ध्रुवीकरण की राजनीति” झलकने लगी है। कांग्रेस चाहती है कि जनता यह देखे कि मोदी की ‘विकासशील दुनिया के नेता’ वाली छवि के बावजूद, वे एक विवादास्पद वैश्विक नेता (नेतन्याहू) के साथ खड़े हैं — जबकि ग़ज़ा में तबाही जारी है।

एक ट्वीट, कई संकेत

मोदी का यह बयान शांति की वकालत भी करता है और नेतन्याहू की प्रशंसा भी — पर यही दोहरा स्वर भारतीय विदेश नीति की नई दिशा को रेखांकित करता है। कांग्रेस की आलोचना सिर्फ शब्दों की नहीं, बल्कि एक “नीति बदलाव के डर” की अभिव्यक्ति है। अब सवाल यह है —क्या भारत ‘संतुलनकारी शक्ति’ बना रहेगा या ‘पक्ष लेने वाला खिलाड़ी’?

Congress reaction on Modi tweet Gaza peace agreement India reaction India foreign policy shift India Palestine support history Indian diplomacy under Modi. Modi Israel relations Netanyahu praise by Modi PM Modi Gaza tweet controversy
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

आंदोलन खत्म हुआ था या अब शुरू होगी दूसरी लड़ाई?

जब एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं… तो देश का नंबर-1 कैसे?

मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता खत्म होना नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सवाल एक अनशन का नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का है

जब जज का नाम इंसाफ़ से बड़ा बना दिया जाए, तो समझ लीजिए संविधान कठघरे में खड़ा है

मतदाता सूची या लोकतंत्र की सूची? चुनाव आयोग पर उठते सवालों का जवाब अब जरूरी है

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • जौहर यूनिवर्सिटी पर फैसला सिर्फ़ एक इमारत का नहीं, देश के भविष्य का है
  • आंदोलन खत्म हुआ था या अब शुरू होगी दूसरी लड़ाई?
  • क्या शिक्षा मंत्रालय को नैतिक नेतृत्व चाहिए या सिर्फ़ राजनीतिक वफ़ादारी?
  • जब एयरपोर्ट पर एक भी फ्लाइट नहीं… तो देश का नंबर-1 कैसे?
  • वक्फ की ज़मीन पर कब्ज़ा अब आसान नहीं! लातूर में भूमाफियाओं को वक्फ बोर्ड की खुली चेतावनी
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

मैं अब ज़्यादा दिनों तक नहीं रहूँगा, क्योंकि  देवेंद्र फडणवीस ने मुझे खत्म करने की साज़िश रची है। लेकिन जब तक मेरे अंदर जान है, तब तक मैं सवाल पूछता ही रहूँगा। मैं किसान की औलाद हूँ, इस मिट्टी में क्रांति करके ही दम लूँगाl#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ravirajsabalepatil #kisan
बारामती के सरकारी अस्पताल को अजित पवार का नाम देने के विरोध में, निषेध करने के लिए ओबीसी नेता  लक्ष्मण हाके बारामती जाएंगे। #elaanews #breakingnews #ajitpawarnews #baramati #lakshmanhake
गिरीराज सिंह(बीजेप गिरीराज सिंह(बीजेपी सांसद) का बयान:"राहुल गांधी की ब्रेन मैपिंग होनी चाहिए। वह झूठ के ठेकेदार बन गए हैं।"— गिरीराज सिंह, बीजेपी सांसद, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा। #elaanews #breakingnews #rahullgandhi #girirajsingh #bjppolitics
"समय आने पर लाडकी बह "समय आने पर लाडकी बहनों की सहायता राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये कर देंगे, बस कोर्ट मत जाइए!"#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ladkibahinyojna #maharashra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility