लातूर जिले में इस बार गणेशोत्सव और ईद-ए-मिलाद पर सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द्र को लेकर अभूतपूर्व कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन और समाज दोनों स्तरों पर जिस तरह की सख़्ती और जागरूकता दिखाई दे रही है, वह आने वाले त्योहारों को शांति और भाईचारे के साथ मनाने की गारंटी देती है।
गणेशोत्सव और ईद-ए-मिलाद के लिए उठाए गए कदम… बना रहे हैं लातूर को ‘लोहे के किले’ जैसा मज़बूत! क्योंकि अगर पुलिस और प्रशासन दोनों ठान लें कि शांति से त्योहार मनेंगे, चैन से लातूर जिएगा तो कोई मुश्किल नहीं इसके लिए सिर्फ कानून पर अमल ज़रूरी है। वरना आपको पता होगा कल छत्रपति संभाजी नगर में पुलिस की लापरवाही के कारण ढोल की आवाज़ के विवाद पर एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। लिहाज़ा लातूर पुलिस प्रशासन को चाहिए 23 अगस्त से 6 सितंबर तक शस्त्रबंदी और जमावबंदी के आदेश पर कड़ाई के साथ अमल करे , जिसमें तलवार, बंदूक , डंडा , चाकू लेकर नहीं घूम सकते यहाँ तक कि पाँच से ज़्यादा लोग एक जगह जमा भी नहीं हो सकते ! जिलाधिकारी वर्षा ठाकुर-घुगे और SP अमोल तांबे का साफ संदेश है–उत्सव मनाओ… पर शांति और कानून का पालन करो। डॉल्बी पर पूरी तरह पाबंदी, पारंपरिक वाद्यों की अपील…हर मंडप पर CCTV कैमरे लगाने की तैयारी… और नया नारा –माझं लातूर… सुरक्षित लातूर! लेकिन पुलिस और प्रशासन मुस्लिम समाज की इस मांग को पूरा करता है तो इन त्योहारों में अमन व शांतता को बाधित करने की कोई गुंजाईश बाकि नहीं रहेगी। जिलाधिकारी को दिए गए निवेदन में मुस्लिम समाज ने कहा – ‘गणेशोत्सव के 10 दिन, शराब की बिक्री बंद करो। क्योंकि दंगों-फसादों की असली जड़ है… शराब! अगर शराब बंद हुई… तो त्योहार और भी पवित्र और सुरक्षित बनेंगे! छोटी सी चिंगारी… बड़े तूफ़ान की वजह बनती है। सोचिए… शस्त्रबंदी से खत्म होगा हथियारों का खौफ़। जमावबंदी से रुकेंगी भीड़ और अशांति। और शराबबंदी से कटेगी फसाद की जड़। तीनों कदम मिलकर लातूर को बना सकते हैं –भारत का सबसे सुरक्षित, शांतिपूर्ण और भाईचारे वाला त्योहार मॉडल!