दोस्तों इस वक़्त महाराष्ट्र में एक नया तमाशा चल रहा है ! हर शहर, हर नगर परिषद, हर महापालिका में एक तोतले साहब लोगों के डॉक्यूमेंट्स जांचते फिर रहे हैं, महाराष्ट्र के स्थानीय मुसलमानों को बांग्ला देशी घोषित कर रहे हैं। साथ में नफरत भी फैला रहे हैं, जिनके पास न कोई संवैधानिक पद है न कोई वोट चोरी की कुर्सी ? फिर भी सुरक्षा ऐसी जैसे देश के मंत्री को दी जाती है- “लेकिन असली सवाल आपके, मेरे, हमारे टैक्स के पैसों से इन्हे सिक्योरिटी क्यों दी जा रही है ? “कोई मंत्री नहीं, कोई सांसद नहीं, कोई संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं, फिर भी VIP ट्रीटमेंट! क्यों? “ये देश का लोकतंत्र है, नेताओं का प्राइवेट सिक्योरिटी क्लब नहीं! टैक्स का पैसा जनता की सुरक्षा पर खर्च होना चाहिए, न कि नफरत फ़ैलाने वालों पर। सरकार का तर्क है—”सोमैया को खतरा है। ठीक है, मान लिया, लेकिन असली सवाल यहां से शुरू होता है—अगर खतरा इतना ही गंभीर है, तो फिर उनसे पूरे महाराष्ट्र की नगर परिषदों और महापालिकाओं में राजनीतिक दौरे क्यों करवाए जा रहे हैं? क्या यह दौरे सरकारी काम का हिस्सा हैं? नहीं। ये पूरी तरह राजनीतिक, निजी और सत्ताधारी पार्टी के प्रचार का हिस्सा है। तो फिर क्यों जनता का पैसा झोंककर इन्हें पूरे राज्य में घुमाया जा रहा है? क्या सिक्योरिटी अब राजनीतिक प्रचार का हथियार बन चुकी है? क्या सत्ता के करीबी नेताओं को सुरक्षा के नाम पर VIP ट्रीटमेंट और फ्री में चुनावी प्रचार का मंच दिया जा रहा है? जनता को जवाब चाहिए— ये खतरे की रिपोर्ट पब्लिक क्यों नहीं की जाती? इन दौरों का खर्च कौन उठा रहा है? और अगर दौरे निजी हैं, तो सरकारी सुरक्षा कवर क्यों इस्तेमाल हो रहा है? लोकतंत्र में सुरक्षा जनता की होनी चाहिए, सत्ता के प्यादों की नहीं। सरकार को बताना होगा -सिक्योरिटी का मतलब जनता की ढाल है या सत्ता का कवच? “महाराष्ट्र के किसान कर्ज़ में डूबकर जान दे रहे हैं…अस्पतालों में दवाई नहीं, सड़कों पर गड्ढे, बेरोज़गार भटक रहे हैं… लेकिन नेताओं के चहेतों पर लाखों-करोड़ों उड़ाए जा रहे हैं!” जहां भी ये तोतले साहब पहुंचे वहां के गैर गोदी पत्रकारों को चाहिए कि वो सवाल पूछे, RTI डालो, जवाब मांगो: ये सिक्योरिटी किस आधार पर दी गई ? लोगों के डॉक्यूमेंट्स जांचने का इन्हें अधिकार किसने और किस कानून के तहत दिया गया है? इस गैर संविधानिक कार्य के खिलाफ कोई भी समाज सेवक या सामाजिक संगठन अदालत में भी जा सकते हैं। आवाज़ उठाओ… क्योंकि चुप्पी का मतलब है—सहमति! महारष्ट्र के हर शहर में इनके पहुँचने से पहले इस न्यूज़ को पहुंचाओ। -जय हिन्द , जय महाराष्ट्र।
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