Close Menu
Elaan NewsElaan News
  • Elaan Calender App
  • एलान के बारे में
  • विदेश
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • एलान विशेष
  • लेख / विचार
Letest

कम से कम मिलावटखोरों से लड़ने वाले ईमानदार अफसरों का तो साथ दीजिए! तुकाराम मुंढे अकेले कब तक लड़ेंगे?

June 28, 2026

समान नागरी संहिता और महाराष्ट्र विधानसभा में बहस

June 28, 2026

क्या अब भी खामोश रहेंगे मुस्लिम रहनुमा? आखिर कब जागेंगे?

June 27, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Trending
  • कम से कम मिलावटखोरों से लड़ने वाले ईमानदार अफसरों का तो साथ दीजिए! तुकाराम मुंढे अकेले कब तक लड़ेंगे?
  • समान नागरी संहिता और महाराष्ट्र विधानसभा में बहस
  • क्या अब भी खामोश रहेंगे मुस्लिम रहनुमा? आखिर कब जागेंगे?
  • अगर डॉ. अली शरीअती आज ज़िंदा होते – भारत में हुसैनियत की एक नई व्याख्या-मजलिस से मिशन तक
  • लातूर में कानून का खौफ खत्म? एक और युवक की हत्या ने उठाए बड़े सवाल
  • विश्वविद्यालय शिक्षा के केंद्र हैं या वैचारिक प्रयोगशाला?
  • वाक़िआ-ए-कर्बला का पैग़ाम
  • पेपर लीक सरकार की नाकामी थी, लेकिन सज़ा छात्रों को दी गई
Facebook Instagram YouTube
Elaan NewsElaan News
Subscribe
Sunday, June 28
  • Elaan के बारे में
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • Elaan विशेष
  • लेख विचार
  • ई-पेपर
  • कैलेंडर App
  • Video
  • हिन्दी
    • English
    • हिन्दी
    • اردو
Elaan NewsElaan News
Home»लेख विचार

समान नागरी संहिता और महाराष्ट्र विधानसभा में बहस

adminBy adminJune 28, 2026 लेख विचार No Comments9 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email WhatsApp

म. मुस्लिम कबीर, लातूर-

भारत एक बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक और लोकतांत्रिक देश है, जहाँ संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। महिलाओं के अधिकार, पारिवारिक कानून और सामाजिक न्याय जैसे विषय हमेशा से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में तीन तलाक, बहुविवाह और समान नागरी संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस में असाधारण तीव्रता आई है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इन बहसों का वास्तविक उद्देश्य महिलाओं को न्याय दिलाना है या फिर यह किसी विशेष राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

तीन तलाक कानून और उसकी वास्तविकता

वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने तीन तलाक को अपराध घोषित करते हुए एक कानून लागू किया। सरकार का दावा था कि इस कानून के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा और न्याय प्राप्त होगा। किंतु हाल ही में राज्य विधानसभा में स्वयं सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा यह स्वीकार किया गया कि एकतरफा तलाक की घटनाएँ अब भी जारी हैं।

इससे यह प्रश्न उठता है कि यदि कानून का मूल उद्देश्य इस प्रथा का अंत करना था तो यह समस्या अब तक क्यों बनी हुई है? वास्तविकता यह है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के विशेषज्ञों और उलेमा ने कानून निर्माण के समय तलाक की प्रक्रिया को व्यवस्थित, स्पष्ट और न्यायिक निगरानी के अधीन बनाने के सुझाव दिए थे, लेकिन सरकार ने सुधारात्मक उपायों के बजाय केवल एक प्रचलित पद्धति को अवैध घोषित करना अधिक उचित समझा। परिणामस्वरूप कानूनी और व्यावहारिक जटिलताएँ बनी रहीं।

महिलाओं पर अत्याचार : धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक समस्या

घरेलू हिंसा, वैवाहिक शोषण और महिलाओं के विरुद्ध अपराध किसी एक धर्म या वर्ग तक सीमित नहीं हैं। सरकारी आँकड़ों और विभिन्न अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि यह समस्या सभी धार्मिक और सामाजिक वर्गों में मौजूद है। इसलिए महिलाओं की समस्याओं को केवल मुस्लिम समाज के संदर्भ में प्रस्तुत करना वास्तविकता का अधूरा और एकपक्षीय चित्रण है।

महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की जड़ें पुरानी सामाजिक मानसिकताओं, लैंगिक असमानता, आर्थिक निर्भरता और न्यायिक व्यवस्था की कमियों में निहित हैं। यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के अधिकारों के प्रति गंभीर है तो उसे सभी वर्गों की महिलाओं की समस्याओं पर समान ध्यान देना होगा।

बहुविवाह का मुद्दा और आँकड़े

राजनीतिक बहसों में अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि बहुविवाह केवल मुसलमानों की समस्या है, जबकि विभिन्न सरकारी रिपोर्टें और अध्ययन इस धारणा की पुष्टि नहीं करते। 21वें विधि आयोग के समक्ष प्रस्तुत जानकारी के अनुसार कुछ आदिवासी समुदायों में बहुविवाह की दर मुसलमानों से अधिक पाई गई थी। यह तथ्य दर्शाता है कि किसी एक धार्मिक समुदाय को निशाना बनाकर पूरे मुद्दे को नहीं समझा जा सकता। यदि कानून निर्माण का उद्देश्य वास्तव में सामाजिक सुधार है तो सभी वर्गों के लिए समान मानदंड अपनाने होंगे।

समान नागरी संहिता : आवश्यकता या राजनीतिक हथियार?

समान नागरी संहिता की अवधारणा संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में मौजूद है, लेकिन इस पर हमेशा मतभेद रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं वाला देश है, जहाँ व्यक्तिगत कानून केवल विवाह और तलाक तक सीमित नहीं बल्कि उत्तराधिकार, संपत्ति, दत्तक ग्रहण और पारिवारिक व्यवस्था से भी जुड़े हैं।

कुछ राज्यों में समान नागरी संहिता के मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं, लेकिन वहाँ भी कुछ वर्गों को छूट दी गई है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि कुछ वर्ग कानून से बाहर रखे जाएँ तो उसे “समान” कैसे कहा जा सकता है? पूर्वोत्तर भारत के अनेक आदिवासी समूहों, पंजाब के सिख समुदायों और विभिन्न अल्पसंख्यक वर्गों ने भी समान नागरी संहिता के कुछ पहलुओं पर अपनी चिंताएँ व्यक्त की हैं। इसलिए इस विषय को केवल मुस्लिम मुद्दा मानना उचित नहीं होगा।

मुस्लिम महिलाओं के अधिकार और राजनीतिक विमर्श

यह सत्य है कि मुस्लिम महिलाओं को भी अन्य महिलाओं की तरह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और सुरक्षा के बेहतर अवसरों की आवश्यकता है। लेकिन जब उनकी समस्याओं का उपयोग केवल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है तो वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। मुस्लिम महिलाओं के कल्याण का अर्थ केवल तलाक या बहुविवाह पर चर्चा नहीं है, बल्कि उनकी शैक्षिक उन्नति, आर्थिक आत्मनिर्भरता, कानूनी सहायता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। यदि सरकारें इन क्षेत्रों में प्रभावी कदम उठाएँ तो महिलाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन आ सकता है।

महिलाओं के अधिकारों का प्रश्न किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे समाज का प्रश्न है। घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और पारिवारिक अन्याय सभी वर्गों में मौजूद हैं। इसलिए इन समस्याओं के समाधान के लिए धार्मिक आधार पर विभाजन के बजाय व्यापक और निष्पक्ष नीतियों की आवश्यकता है। समान नागरी संहिता हो या मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार, इन सभी मामलों पर व्यापक परामर्श, संवैधानिक सिद्धांतों, धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के मूल अधिकारों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए। किसी भी कानून की सफलता का मापदंड राजनीतिक लाभ नहीं बल्कि जनता, विशेषकर महिलाओं को मिलने वाला वास्तविक न्याय होना चाहिए।

महाराष्ट्र में समान नागरी संहिता लागू होने की आशंका : विधानसभा की हालिया बहस और मुस्लिम पर्सनल लॉ का भविष्य

भारत में समान नागरी संहिता का विषय एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा में हुई बहस ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि राज्य सरकार निकट भविष्य में समान नागरी संहिता लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। यद्यपि सरकार ने अभी कोई अंतिम विधेयक प्रस्तुत नहीं किया है, फिर भी विधानसभा में दिए गए वक्तव्य और सरकारी घोषणाएँ इस दिशा में स्पष्ट संकेत देती हैं।

महाराष्ट्र विधानसभा में क्या हुआ?

23 जून 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने नासिक के कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए तीन तलाक और बहुविवाह का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम महिलाएँ कुछ सामाजिक और पारिवारिक अन्याय का सामना कर रही हैं और सरकार को इस विषय पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए। इस चर्चा के उत्तर में गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने घोषणा की कि सरकार समान नागरी संहिता के क्रियान्वयन के पक्ष में सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है और इसके मसौदे की तैयारी के लिए एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित की जा रही है।

विधायक सना मलिक का विधानसभा में पक्ष

चर्चा के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) की विधायक सना मलिक ने इस मुद्दे पर अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि महिलाओं पर अत्याचार और घरेलू हिंसा को केवल मुसलमानों से क्यों जोड़ा जा रहा है जबकि यह समस्या सभी धर्मों और वर्गों में मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बहुविवाह के विषय पर चर्चा की जा रही है तो कुरआन में वर्णित उसकी शर्तों और प्रतिबंधों का भी उल्लेख होना चाहिए। उनके अनुसार पाकिस्तान सहित कुछ देशों ने भी इन्हीं इस्लामी सिद्धांतों के आधार पर कानून बनाए हैं, इसलिए केवल मुसलमानों को लक्ष्य बनाना उचित नहीं है।

तीन तलाक कानून और वर्तमान स्थिति

विधानसभा में हुई चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि सरकार ने स्वयं स्वीकार किया कि तीन तलाक के विरुद्ध कानून बनने के बावजूद इस प्रकार की शिकायतें अभी भी प्राप्त हो रही हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार पिछले दो वर्षों में राज्य में तीन तलाक से संबंधित दर्जनों शिकायतें दर्ज की गई हैं। इससे यह प्रश्न उठता है कि यदि कानून का उद्देश्य इस समस्या का पूर्ण उन्मूलन था तो ऐसे मामले अब भी क्यों सामने आ रहे हैं? आलोचकों का कहना है कि केवल दंडात्मक कानून पर्याप्त नहीं होते, बल्कि पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए प्रभावी सामाजिक और कानूनी व्यवस्था भी आवश्यक है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ और समान नागरी संहिता

समान नागरी संहिता का अर्थ है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और पारिवारिक मामलों से संबंधित एक ही कानून सभी नागरिकों पर लागू हो। इसके विपरीत वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न धार्मिक समुदायों के अपने-अपने व्यक्तिगत कानून हैं। मुस्लिम संगठनों, उलेमा और कानूनी विशेषज्ञों के एक बड़े वर्ग का मत है कि धार्मिक स्वतंत्रता भारतीय संविधान की मूल भावना का हिस्सा है और व्यक्तिगत कानूनों में किसी भी परिवर्तन से पहले सभी संबंधित समुदायों से व्यापक परामर्श आवश्यक है।

क्या वास्तव में सभी पर समान कानून लागू होगा?

समान नागरी संहिता के समर्थक इसे समानता और एकरूपता का माध्यम बताते हैं, लेकिन इसके आलोचक यह प्रश्न उठा रहे हैं कि यदि कुछ वर्गों को इसके दायरे से बाहर रखा जाए तो इसे “समान” कैसे कहा जा सकता है? इस संदर्भ में पहले ही संकेत मिल चुके हैं कि कुछ राज्यों में आदिवासी समुदायों को इस कानून से छूट दी गई है। इसी कारण विभिन्न सामाजिक और धार्मिक वर्गों में यह चर्चा जारी है कि प्रस्तावित कानून वास्तव में सभी नागरिकों के लिए समान होगा या नहीं।

मुस्लिम नेतृत्व की जिम्मेदारी

वर्तमान परिस्थितियों में मुस्लिम नेतृत्व, उलेमा, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय इस विषय का अध्ययन कानूनी और बौद्धिक दृष्टि से करें। यदि सरकार कोई मसौदा प्रस्तुत करती है तो उसका विस्तृत अध्ययन कर संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक आधारों पर अपनी राय प्रस्तुत की जानी चाहिए।

महाराष्ट्र विधानसभा में हालिया बहस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समान नागरी संहिता अब केवल एक राजनीतिक नारा नहीं रह गई है, बल्कि राज्य सरकार इसके लिए व्यावहारिक कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। समिति के गठन और मसौदा तैयार करने की घोषणा इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।

हालाँकि वास्तविक प्रश्न यह है कि प्रस्तावित कानून का स्वरूप क्या होगा, उसका दायरा कितना व्यापक होगा और विभिन्न धार्मिक तथा सामाजिक समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा किस सीमा तक सुनिश्चित की जाएगी। इसलिए आवश्यक है कि इस विषय पर गंभीर, विद्वत्तापूर्ण और संवैधानिक आधार पर चर्चा की जाए ताकि न्याय, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलित मार्ग खोजा जा सके।

मो. 8208435414

Read Next :

क्या अब भी खामोश रहेंगे मुस्लिम रहनुमा? आखिर कब जागेंगे?

Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email WhatsApp Copy Link
admin
  • Website

Keep Reading

अगर डॉ. अली शरीअती आज ज़िंदा होते – भारत में हुसैनियत की एक नई व्याख्या-मजलिस से मिशन तक

वाक़िआ-ए-कर्बला का पैग़ाम

आज हम किस चौराहे पर खड़े हैं?

बढ़ती नफरत के बीच उम्मीद की किरणें

आरएसएस प्रमुख का घर वापसी अभियान तेज करने का आव्हान

देश में घटते मेलजोल के बीच भाईचारे का परचम थामे मोहम्मद दीपक

Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Latest Post
  • कम से कम मिलावटखोरों से लड़ने वाले ईमानदार अफसरों का तो साथ दीजिए! तुकाराम मुंढे अकेले कब तक लड़ेंगे?
  • समान नागरी संहिता और महाराष्ट्र विधानसभा में बहस
  • क्या अब भी खामोश रहेंगे मुस्लिम रहनुमा? आखिर कब जागेंगे?
  • अगर डॉ. अली शरीअती आज ज़िंदा होते – भारत में हुसैनियत की एक नई व्याख्या-मजलिस से मिशन तक
  • लातूर में कानून का खौफ खत्म? एक और युवक की हत्या ने उठाए बड़े सवाल
Categories
  • Uncategorized
  • एलान विशेष
  • धर्म
  • भारत
  • महाराष्ट्र
  • लातुर
  • लेख विचार
  • विदेश
  • विशेष
Instagram

elaannews

📺 | हमारी खबर आपका हौसला
⚡️
▶️ | NEWS & UPDATES
⚡️
📩 | elaannews1@gmail.com
⚡️

मैं अब ज़्यादा दिनों तक नहीं रहूँगा, क्योंकि  देवेंद्र फडणवीस ने मुझे खत्म करने की साज़िश रची है। लेकिन जब तक मेरे अंदर जान है, तब तक मैं सवाल पूछता ही रहूँगा। मैं किसान की औलाद हूँ, इस मिट्टी में क्रांति करके ही दम लूँगाl#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ravirajsabalepatil #kisan
बारामती के सरकारी अस्पताल को अजित पवार का नाम देने के विरोध में, निषेध करने के लिए ओबीसी नेता  लक्ष्मण हाके बारामती जाएंगे। #elaanews #breakingnews #ajitpawarnews #baramati #lakshmanhake
गिरीराज सिंह(बीजेप गिरीराज सिंह(बीजेपी सांसद) का बयान:"राहुल गांधी की ब्रेन मैपिंग होनी चाहिए। वह झूठ के ठेकेदार बन गए हैं।"— गिरीराज सिंह, बीजेपी सांसद, ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा। #elaanews #breakingnews #rahullgandhi #girirajsingh #bjppolitics
"समय आने पर लाडकी बह "समय आने पर लाडकी बहनों की सहायता राशि 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये कर देंगे, बस कोर्ट मत जाइए!"#elaannews #breakingnews #devendrafadanvis #ladkibahinyojna #maharashra
Follow on Instagram
Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

News

  • महाराष्ट्र
  • भारत
  • विदेश
  • एलान विशेष
  • लेख विचार
  • धर्म

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2024 Your Elaan News | Developed By Durranitech
  • Privacy Policy
  • Terms
  • Accessibility