गुजरात के कठलाल-बालासिनोर राजमार्ग पर रविवार को एक मामूली सड़क दुर्घटना के बाद
हिंसक सांप्रदायिक झड़पें हुईं। इस दौरान मुस्लिमों की दुकानों और एक स्थानीय ईदगाह में
तोड़फोड़ की गई।
यह घटना कथित तौर पर गोधरा के एक मुस्लिम व्यक्ति की कार और कठलाल के एक हिंदू
की मोटरसाइकिल के बीच टक्कर के बाद हुई। इसके बाद झड़प शुरू हो गई, जो हिंसक हो
गई।
स्थानीय पत्रकार सहल कुरैशी के अनुसार, तनाव तब बढ़ गया जब घटनास्थल पर मौजूद
खोखरवाड़ा गांव के कुछ मुस्लिम लड़कों ने बीच-बचाव करके स्थिति को शांत करने का
प्रयास किया और स्थिति को बिगड़ता देख उन्होंने कार चालक को वहां से चले जाने को
कहा।
कार चालक के वहां से चले जाने के बाद, कठलाल की भीड़ ने मामले में हस्तक्षेप करने वाले
लड़कों के समूह को निशाना बनाना शुरू कर दिया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब मुस्लिम
भीड़ भी इकट्ठा हो गई, जिसके परिणामस्वरूप हिंसक टकराव हुआ।
इस दौरान एक गाड़ी में आग लगा दी गई, जिससे पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति और भी
गंभीर हो गई। कठलाल पुलिस स्टेशन के बाहर “जय श्री राम” के नारे लगाए गए।
कठलाल पुलिस स्टेशन के पास स्थित ईदगाह में भी तोड़फोड़ की गई, क्योंकि पुलिस ने कोई
हस्तक्षेप नहीं किया। स्थानीय ग्रामीणों के बीच वायरल वीडियो में “कठलाल के राजा” जैसे
कैप्शन के साथ, भीड़ दुकानों में तोड़फोड़ करती दिखाई दे रही है, जबकि पीछे से उकसाने
वाले गाने बजाए जा रहे हैं।
ऑब्जर्वर पोस्ट (टीओपी) द्वारा जांच की गई एक वीडियो में एक मिनी ट्रक से बांस उतारते
हुए देखा गया, जिसका उपयोग हमलावरों ने संपत्तियों को नष्ट करने के लिए किया था। एक
अन्य वीडियो में, एक व्यक्ति को गुजराती में बार-बार यह कहते हुए सुना जा सकता है, “इस
दुकान को नष्ट मत करो। यह हमारे हिंदू भाई की है।”
अधिकारियों ने कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।
स्थानीय अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि हिंसा रोकने के लिए कड़े सुरक्षा के इंतजाम
किए गए हैं।
पता चला है कि स्थानीय अधिकारियों द्वारा गंभीर आरोपों के आरोपी कठलाल के एक
मुस्लिम शिक्षक को घर गिराने का नोटिस दिए जाने के बाद से ही इलाके में तनाव काफी
बढ़ गया है।
सूरत के सैयदपुरा इलाके में रविवार देर रात हिंसा तब भड़क उठी जब वारियाली बाजार में
एक गणेश पंडाल पर कथित तौर पर पत्थर फेंके गए। इसके बाद दो पक्षों के बीच टकराव
हुआ और मुस्लिमों की दुकानों, वाहनों और एक मस्जिद में भारी तोड़फोड़ की गई।
यह घटना रात 9-10 बजे के बीच हुई जब कथित तौर पर 8 से 12 साल के बच्चों द्वारा
गणेश पंडाल पर पत्थर फेंके गए। दलित और मुस्लिम पृष्ठभूमि के बच्चों को स्थानीय लोगों
द्वारा पत्थरबाजी के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने के बाद उन्हें ऑटो-रिक्शा में पंपिंग पुलिस
स्टेशन ले जाया गया।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पत्थर गलती से पंडाल पर लग गए होंगे जब बच्चे खेल रहे थे।
हालांकि, स्थिति तेजी से बिगड़ गई और इस घटना का फायदा उन लोगों ने उठाया जो
नफरत फैलाना चाहते थे, जिससे हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव और बढ़ गया।
स्थानीय पत्रकार सहल कुरैशी ने द ऑब्जर्वर पोस्ट को बताया कि हिंदू संगठनों के सदस्य,
भाजपा विधायक कांति बलार के साथ पुलिस स्टेशन पर इकट्ठा हुए, जिससे स्थिति और बिगड़
गई। बलार को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया, “हम मुसलमानों की गुंडागर्दी बर्दाश्त
नहीं करेंगे।” जैसे-जैसे तनाव बढ़ता गया, भीड़ ने मुसलमानों के घरों को ध्वस्त करने की मांग
को लेकर “बुलडोजर, बुलडोजर” के नारे लगाना शुरू कर दिया।
थोड़ी ही देर में हिंसा भड़क उठी, जिसमें हिंदू कट्टरपंथियों की भीड़ ने मुसलमानों की दुकानों,
वाहनों और पास की एक मस्जिद को निशाना बनाया। दोनों तरफ से पथराव हुए, जिसमें
पुलिस उपायुक्त विजय सिंह गुर्जर सहित कई लोग घायल हो गए।
रात करीब 2 बजे यह बात सामने आई कि पुलिस बल ने मुसलमानों के घरों में जबरन
घुसकर 27 लोगों को हिरासत में लिया है। इलाके के मुस्लिम लोगों ने आरोप लगाया कि
बिना नाम की प्लेट के सादे कपड़ों में अधिकारियों ने आधी रात को दरवाजे तोड़ दिए।
हालांकि, पुलिस ने कहा है कि वे हिंसा में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने के लिए कार्रवाई
कर रहे थे। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है लेकिन पुलिस का दावा है कि अब इलाका नियंत्रण
में है।
हेट डिटेक्टर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो में महिला को कहते हुए सुना जा
सकता है कि उसने डर से घर में ताला बंद कर दिया था क्योंकि लोग मुस्लिमों पर हमले
की बात कर रहे थे। इस वीडियो में महिला का कहना है कि पुलिस उनकी खिड़की और
दरवाजों को जोर-जोर से पीट रही थी और दरवाजा खोलने के लिए कह रही थी। महिला
का आरोप है कि पुलिस ने उनकी खिड़की के शीशे तोड़ दिए और लोगों को उठाकर ले गई।
गुजरात के सूरत के सैयदपुरा में गणेश पंडाल को लेकर सांप्रदायिक तनाव के बाद अब
मुस्लिमों की दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया। प्रशासन ने इसे अवैध बताया है। हमेशा की
तरह स्थानीय प्रशासन ने कुछ मुस्लिमों के दोषी पाए जाने के बाद दुकानों और घरों को
अवैध मानकर उस पर बुलडोजर कार्रवाई की।हाल ही मे माननीय उच्चतम न्यायालय ने
बुलडोज़र कार्रवाई पर चिंता जताते हुए कहा था ‘अगर कोई दोषी भी है तो भी घर नहीं
गिराया जा सकता’।
कांग्रेस नेता असलम साइकिलवाला ने घटना पर चिंता व्यक्त की और गुजरात के गृह मंत्री हर्ष
संघवी से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि निर्दोष लोगों को गलत तरीके से गिरफ्तार
न किया जाए।
सूरत पुलिस द्वारा अब तक 27 मुस्लिम युवकों को हिरासत में लिए जाने की खबर है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की है, यह स्पष्ट नहीं है। देर रात मुस्लिम इलाके
में बुलडोजर पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है। पथराव के बाद हिंदू संगठनों ने
बुलडोजर के इस्तेमाल की मांग की थी।
ये तो हुआ गुजरात का मामला जहां भाजपा की सरकार ही नहीं बल्कि ये राज्य भाजपा की
प्रयोग शाला भी है अब बात करते हैं हिमाचल प्रदेश की जहां कॉंग्रेस की सरकार है।
उधर राजधानी शिमला के सबसे बड़े उपनगर संजौली में एक मस्जिद में कथित अवैध निर्माण
के मामले में बुधवार (11 सितंबर) को जमकर बवाल हुआ. हजारों की तादाद में जुटे उग्र
हिंदुओं ने सड़कों पर बैरिकेडिंग तोड़ी और करीब पांच घंटों तक नारेबाजी की. यह हिंसक
भीड़ मस्जिद के 100 मीटर तक पहुंच गई और उनकी पुलिस के साथ झड़प भी हुई.
संजौली में हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के ऐलान से जिला प्रशासन ने बुधवार सुबह सात बजे से
धारा 163 लागू कर दी थी. प्रदेश की सभी छह बटालियन को संजौली के चप्पे-चप्पे पर
तैनात किया गया था. लेकिन 11 बजे प्रदर्शनकारियों ने संजौली की ओर कूच किया और
‘भारत माता की जय’, ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने लगे. पुलिस ने अपने समर्थकों संग संजौली
पहुंचे हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी कमल गौतम को हिरासत में ले लिया.
हिमाचल प्रदेश के डीजीपी अतुल वर्मा ने बताया कि इस उपद्रव में महिला कॉन्स्टेबल पूजा
(25), कॉन्स्टेबल खेम राज (28) समेत छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. एक महिला कॉन्स्टेबल
अब भी इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय लोगों
का यह भी कहना है कि हमलावर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से थे.
बताया गया है कि यहां भी इस विवाद को हवा तब मिली जब 30 अगस्त को शिमला के
मल्याणा में एक 37 वर्षीय शख्स विक्रम सिंह के साथ एक मुस्लिम युवक और उसके दोस्तों ने
मारपीट की. इस झड़प में विक्रम सिंह बुरी तरह जख्मी हो गए थे. पुलिस ने इस केस में
छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि ये आरोपी हमले के बाद मस्जिद में
आकर छुप गए थे. उसके बाद हिंदू संगठनों ने संजौली में प्रदर्शन किया और मस्जिद को
अवैध बताते हुए गिराने की मांग की गई.
1 सितंबर को भीड़ इस मस्जिद के सामने पहुंची और हनुमान चालीसा का पाठ किया. इसके
बाद यह मामला सियासी तूल पकड़ने लगा. हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में भी यह
मामला प्रमुखता से उठा.
गौरतलब है कि मल्याणा क्षेत्र कुसुंपटी विधानसभा के अंतर्गत आता है और कांग्रेस के नेता
और वर्तमान कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह यहां के विधायक हैं.
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बजाये इस मसले को हल करने के विधानसभा में यह कहा कि बाहर
से आ रहे लोग शिमला का माहौल खराब कर रहे हैं. उन्होंने शिमला में रोहिंग्या मुसलमानों
के होने का भी जिक्र किया.
इस बीच मस्जिद के अवैध निर्माण के खिलाफ प्रदर्शन कर रही भीड़ का भी ध्यान शिमला
और राज्य के अन्य हिस्सों में बसे मुस्लिम प्रवासियों की ओर केंद्रित हुआ. उन्होंने दावा किया
कि प्रवासी मुस्लिम सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के अलावा स्थानीय लोगों से नौकरियां छीन
रहे हैं.
इस मस्जिद का निर्माण 2007 में शुरू हुआ था. स्थानीय लोगों ने मस्जिद को अवैध बताते
हुए वर्ष 2010 में इसके खिलाफ नगर निगम की अदालत में याचिका दाखिल की. तब से यह
मामला कोर्ट में विचाराधीन है. इस बीच प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस, दोनों की ही सरकारें
रहीं, लेकिन किसी ने भी मसले को हल करने में गंभीरता नहीं दिखाई.
कांग्रेस विधायक एवं ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने 4 सितंबर को
राज्य विधानसभा में कहा, ‘दरअसल नगर निगम की कोर्ट में मस्जिद के अवैध निर्माण को
लेकर बार-बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन फिर भी चार से पांच मंजिल अवैध तरीके से
खड़ी हो गईं.’
मस्जिद की ज़मीन पर भी विवाद है. अनिरुद्ध सिंह ने बयान दिया था कि यह मस्जिद
हिमाचल सरकार की जमीन पर बनी है. हालांकि वक्फ़ बोर्ड ने बीते शनिवार (7 सितंबर)
को शिमला की एक अदालत में दावा किया कि मस्जिद का निर्माण उनकी जमीन पर हुआ
है. मामले की आगामी सुनवाई पांच अक्टूबर को होगी.