एक क़ौम… जो फ़िरऔन से बचाई गई। एक नबी… जिसने उन्हें समंदर के पार पहुंचाया। और बदले में क्या हुआ? वो नबी भी उन्हीं की ग़द्दारी का शिकार बना।” मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को आज़ादी दिलाई। लेकिन वो क़ौम जो अल्लाह की सबसे ज़्यादा नेमतों से नवाज़ी गई थी, वही सबसे बड़ी नाशुक्री निकली।”मूसा अलैहिस्सलाम… वो नबी जिसने यहूदियों को फ़िरऔन के ज़ुल्म से आज़ादी दिलाई। लेकिन उन्हें बदले में क्या मिला ? उनके ही लोग सोने का बछड़ा पूजने लगे, नबी की बातों को झुठलाने लगे। इसी बनी इस्राईल क़ौम ने हर दौर में अपने पैग़म्बरों से धोखा किया —मूसा अलैहिस्सलाम को छोड़ दिया, ईसा अलैहिस्सलाम को सलीब दिलवाने में हिस्सा लिया। और अल्लाह ने इन पर अपना ग़ज़ब नाज़िल किया — 40 साल तक जंगल में भटकते रहे।” फिर जब ईसा अलैहिस्सलाम आए —उन्हीं यहूदियों ने साजिश रची। हुकूमत से मिलकर उन्हें सूली देने की कोशिश की। अल्लाह ने उन्हें बचा लिया, लेकिन बनी इस्राईल की ग़द्दारी फिर सामने आई।”फिर आया मदीना का दौर। रहमतुल्लिलआलमीन — हज़रत मुहम्मद ﷺ ने मदीना में यहूदियों के साथ मोअहिदा किया जिसमे यहूदियों ने कहा था — ‘मदीने का दिफ़ा हम सबकी ज़िम्मेदारी होगी।’लेकिन क्या हुआ? बनू कैनुका ने धोखा दिया, मुसलमान औरत पर हमला किया। बनू नज़ीर ने रसूल ﷺ को मारने की साज़िश की। बनू कुरैज़ा ने जंग-ए-अहज़ाब के दौरान मक्का वालों से मिलकर मदीना को बेच दिया।”हर मर्तबा, जब भी यहूदियों अमान दी गई — उन्होंने ख़ंजर पीछे से मारा। और हर बार सज़ा मिली — इंसाफ़ की।”और आज… वही बनी इस्राईल की औलाद — ग़ज़ा में बच्चों पर बम बरसा रही है, ईरान पर मिसाइलें गिरा रही है, और कह रही है — ‘हम पीड़ित हैं!'” “जिन्होंने अपने पैग़म्बरों को नहीं छोड़ा — वो दुनिया को क्या छोड़ेंगे? इतिहास गवाह है — ये कौम जहाँ भी गई, वहाँ फ़साद और फ़रेब लेकर गई। चाहे अरब हो या यूरोप, रशिया हो या अमरीका — हर जगह व्यापार, मीडिया, बैंकिंग, हथियार और राजनीति में घुसकर इन्होंने अपने एजेंडे थोपे। और अब इज़रायल के ज़रिए पूरे मिडिल ईस्ट को तबाह करने पर तुली है।” “क्या ये महज़ इत्तिफ़ाक़ है…कि हिटलर के दौर के बाद दुनिया ने यहूदियों को एक मुल्क दे दिया — और उसी मुल्क ने अब तक 60 हज़ार से ज़्यादा फ़िलिस्तीनियों को मिटा दिया?” “हमें हिटलर की नीयत से नहीं, उसकी चेतावनी से सबक लेना चाहिए —कभी किसी कौम को सिर्फ़ उसका दुख मत सुनो, उसकी करतूत भी देखो। वरना वही इतिहास दोहराया जाएगा — बस किरदार बदल जाएंगे।” “ज़ालिम चाहे कोई भी हो — इंसाफ़ के तराज़ू में तौला जाएगा।
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