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Home»विदेश

ज़ोहरान ममदानी पर बढ़ते हमलों से अमेरिका की ‘सेक्युलर’ पहचान पर सवाल

adminBy adminJuly 3, 2025 विदेश No Comments4 Mins Read
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ज़ोहरान ममदानी कौन हैं?:- ज़ोहरान ममदानी एक मुसलमान नेता हैं जो 2018 में अमेरिकी नागरिक बने और 2020 में न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य चुने गए। अब 2025 में, उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी जीत ली है। अगर वे चुनाव जीतते हैं तो न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे।-इंशाअल्लाह

लेकिन जैसे ही उन्होंने ये चुनाव जीता, उनके खिलाफ इस्लामोफोबिक (मुस्लिम-विरोधी) हमले तेज़ हो गए। अमेरिका जैसे देश में मुसलमान नेता पर इतने हमले क्यों? अमेरिका खुद को धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) देश कहता है, लेकिन ज़ोहरान ममदानी के खिलाफ हो रही बयानबाज़ी से ये दावा झूठा लगता है। डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ममदानी मेयर बनते हैं तो वह न्यूयॉर्क की फंडिंग रोक देंगे।

रिपब्लिकन सांसद एंडी ओगल्स ने तो यहां तक कह दिया कि ममदानी की नागरिकता रद्द करके उन्हें वापस भेज देना चाहिए। उन्होंने उन्हें ‘छोटा मुहम्मद’ कहा और उन पर आतंकियों से सहानुभूति रखने का आरोप लगाया। एक और सांसद नैंसी मैक ने ईद के मौके पर ज़ोहरान की पारंपरिक ड्रेस की फोटो शेयर करते हुए 9/11 की याद दिलाई, जैसे मुसलमान होना ही एक अपराध हो। यह सब दर्शाता है कि अमेरिका में मुसलमान नेता होना कितना मुश्किल है—even अगर आप वहां के कानून के मुताबिक नागरिक हैं, पढ़े-लिखे हैं और जनता का समर्थन भी आपके पास है।

ज़ोहरान का जवाब क्या है?:- ज़ोहरान ने साफ कहा है, “मेरी जीत यह दिखाती है कि मुसलमान होना भी किसी अन्य धर्म के होने जैसा ही है। लेकिन हर दिन मेरे नाम और आस्था पर हमला होता है। यह आसान नहीं है।” उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कई बार अपने खिलाफ आए धमकी भरे मैसेज और कॉल की रिकॉर्डिंग जनता को सुनाई।

क्या ये हमले अमेरिका के लिए नए हैं?:- नहीं। अमेरिका में मुस्लिम नेताओं पर पहले भी ऐसे हमले होते रहे हैं। इल्हान उमर और राशिदा तलाइब, दो मुस्लिम महिला सांसदों को भी इसी तरह की नफरत का सामना करना पड़ा है। बराक ओबामा पर ट्रंप ने गलत प्रचार किया था कि वे मुस्लिम हैं और उनका जन्म कीनिया में हुआ है, जबकि ओबामा ईसाई हैं और हवाई में जन्मे थे।

ममदानी का भारत से क्या रिश्ता है?:- ज़ोहरान के पिता महमूद ममदानी मशहूर प्रोफेसर हैं और माँ मीरा नायर जानी-मानी फिल्म निर्देशक हैं, जिन्होंने ‘सलाम बॉम्बे’, ‘मॉनसून वेडिंग’ जैसी फिल्में बनाई हैं। ज़ोहरान भारत की राजनीति पर भी नजर रखते हैं। उन्होंने भारत में एनआरसी और मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। 2023 में योग दिवस पर मोदी जब न्यूयॉर्क आए थे, तो ममदानी ने उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयान दिया था।

अमेरिका की ‘सेक्युलर’ सोच की असलियत?:- अमेरिका खुद को सेक्युलर और लोकतांत्रिक देश कहता है, लेकिन ज़ोहरान ममदानी के खिलाफ बढ़ती नफरत ये दिखा रही है कि: मुसलमान अगर खुलकर अपनी पहचान के साथ राजनीति करे तो उसे ‘खतरा’ माना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रंप तक उसे ‘फंड रोकने’ और ‘बाहर निकालने’ की धमकी दे रहे हैं। यहां तक कि डेमोक्रेटिक पार्टी भी पूरी तरह उनके साथ नहीं खड़ी दिख रही। यानी धर्मनिरपेक्षता सिर्फ दिखावे की बात रह गई है—चाहे अमेरिका हो या भारत।

फिर भी ज़ोहरान क्यों महत्वपूर्ण हैं?:- ज़ोहरान की जीत इस बात का संकेत है कि नफ़रत के माहौल में भी उम्मीद बची है। उन्हें गोरे अमेरिकियों, यहूदी समुदाय, ब्लैक अमेरिकन, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी और भारतीय प्रवासियों का समर्थन मिला है। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर भी एक नई बहस शुरू की है कि क्या प्रवासी, मुसलमान और समाजवादी सोच रखने वाले लोग भी अमेरिकी राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं?

यह लेख अमेरिका की तथाकथित सेक्युलर राजनीति की असलियत को उजागर करता है—कि वहां भी मुसलमानों के खिलाफ ज़हर बोला जा सकता है, और मुख्यधारा की पार्टियां भी अक्सर चुप रहती हैं।

✍️ यह लेख बीबीसी के संवाददाता रजनीश कुमार द्वारा लिखे गए लेख के कुछ अंशों पर आधारित है।

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