इसराइल ने यमन की राजधानी सना पर हमला कर दिया। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह कार्रवाई हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों के जवाब में की गई। लेकिन सवाल उठता है – क्या यह वाकई सिर्फ “जवाबी हमला” है या फिर मध्य पूर्व में एक नए और ख़तरनाक युद्ध की पटकथा लिखी जा रही है?
हमला कहाँ हुआ?:- इसराइली सेना ने खुले तौर पर एक्स (Twitter) पर पोस्ट कर दावा किया कि उसने सना में हूतियों के कई ठिकानों पर हवाई हमला किया। इनमें – राष्ट्रपति भवन से जुड़ा सैन्य इलाक़ा, पावर प्लांट्स, और फ़्यूल स्टोरेज केंद्र शामिल हैं। यानि यह हमला सिर्फ़ सैन्य प्रतिष्ठानों पर नहीं बल्कि यमन की नागरिक ढांचागत संरचना पर भी हुआ है। इसका असर सिर्फ हूती विद्रोहियों पर नहीं, बल्कि आम जनता की ज़िंदगी पर भी पड़ने वाला है।
इसराइल का तर्क:- इसराइली सेना का दावा है कि हूती विद्रोही ईरान समर्थित हैं और नागरिक इलाक़ों का इस्तेमाल “आतंकी गतिविधियों” के लिए करते हैं। यानी इसराइल ने अपने हमले को आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई बताने की कोशिश की है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है – क्या वास्तव में बिजलीघर और तेल भंडारण टैंक आतंकवादी ठिकाने थे, या फिर यह हमला यमन की रीढ़ तोड़ने की रणनीति है?
असलियत क्या है?:- हूती विद्रोही लंबे समय से सऊदी अरब और इसराइल समर्थित ताक़तों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं। हाल के महीनों में हूतियों ने इसराइल और लाल सागर से होकर जाने वाले व्यापारिक जहाज़ों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज़ किए हैं।
यह हमला सीधा-सीधा ईरान–इसराइल टकराव का हिस्सा नज़र आता है। यानी असल खेल सिर्फ़ यमन नहीं, बल्कि ईरान बनाम इसराइल है। हूती सिर्फ़ मोहरे हैं।
बड़ा ख़तरा – मध्य पूर्व बारूदखाना बन रहा है – गाज़ा युद्ध पहले से चल रहा है, अब यमन भी युद्धभूमि में बदल रहा है। ऊर्जा आपूर्ति पर असर – पावर प्लांट्स और फ़्यूल डिपो को निशाना बनाने का मतलब है कि आम यमनी जनता अंधेरे और भूख में धकेली जाएगी।
ईरान की प्रतिक्रिया – अगर ईरान खुलकर इसमें कूद पड़ा, तो यह संघर्ष सिर्फ़ यमन-इसराइल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में आग भड़का सकता है।
तीखा सवाल:- क्या इसराइल हूतियों पर हमला कर “आतंकवाद” मिटा रहा है या फिर यमन की पहले से तबाह ज़िंदगी को और नरक बना रहा है? क्या यह कार्रवाई सुरक्षा की मजबूरी है या फिर ईरान तक संदेश देने की चालाकी?
नतीजा साफ़ है – यह हमला मध्य पूर्व में एक और मोर्चा खोलने जैसा है। यमन पहले ही गृहयुद्ध और मानवीय त्रासदी से कराह रहा है। इसराइल का यह कदम आग में घी डालने जैसा है, और इसका असर सिर्फ़ हूतियों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाला है।