अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास पर आरोप लगाया कि वह इसराइली बंधकों को “मानवीय ढाल” बना रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी—“अगर ऐसा हुआ तो सभी शर्तें ख़त्म हो जाएंगी। सभी बंधकों को तुरंत रिहा करो।”
उनकी यह टिप्पणी एक नए भूचाल का संकेत मानी जा रही है।
ग़ज़ा पर भारी बमबारी – “ग़ज़ा जल रहा है”:- सोमवार रात इसराइल ने ग़ज़ा सिटी पर जबरदस्त बमबारी की। रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने कहा—“ग़ज़ा जल रहा है, और यह तब तक रुकेगा नहीं जब तक मिशन पूरा नहीं हो जाता।”
शहर के कई इलाक़े मलबे में बदल गए हैं, नागरिक लगातार हताहत हो रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र का आरोप – “इसराइल कर रहा है जनसंहार”:- संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इसराइल ने ग़ज़ा में जनसंहार के चार बड़े कृत्य अंजाम दिए हैं। रिपोर्ट में हत्या, शारीरिक-मानसिक क्षति, असहनीय हालात और जन्म रोकने जैसे कदमों का ज़िक्र किया गया। इसराइल ने रिपोर्ट को “झूठा और भ्रामक” कहा, लेकिन हज़ारों लाशें दुनिया से अलग कहानी बयां कर रही हैं।
फ़लस्तीनी विदेश मंत्रालय की गुहार – “तुरंत हस्तक्षेप करो”:- ग़ज़ा पर लगातार होते हमलों के बीच फ़लस्तीनी विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। उसने चेतावनी दी—“ग़ज़ा सिटी को सामूहिक कब्रिस्तान में बदला जा रहा है।”
इसराइली सेना का दावा – “850 ठिकाने तबाह”:- इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने कहा कि उसकी टुकड़ियों ने ग़ज़ा में 850 से ज़्यादा ठिकानों और सैकड़ों आतंकवादियों को निशाना बनाया है। लेकिन सवाल है कि जिन घरों और अस्पतालों के मलबे से मासूम बच्चों की लाशें निकल रही हैं, क्या वे भी “ठिकाने” कहलाते हैं?
मौत की सड़क – ग़ज़ा से पलायन:- हज़ारों फ़लस्तीनी परिवार ग़ज़ा सिटी छोड़ने पर मजबूर हैं। इसराइली सेना ने सिर्फ़ अल-रशीद कोस्टल रोड को मंज़ूरी दी है।
लेकिन यही रास्ता मौत की गलियारा बन गया है—भारी जाम, सड़क पर फंसी गाड़ियाँ और ऊपर से लगातार हवाई हमले।
नतीजा – 21वीं सदी का सबसे बड़ा अपराध?:- ये छः घटनाएँ बताती हैं कि ग़ज़ा केवल एक जंग का मैदान नहीं, बल्कि इंसानियत की परीक्षा का मैदान है।
ट्रंप की धमकी, इसराइल की बमबारी, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और फ़लस्तीन की पुकार—सब एक ही सच्चाई कह रहे हैं: ग़ज़ा जल रहा है, और दुनिया खामोश है।
आने वाली पीढ़ियाँ पूछेंगी—जब ग़ज़ा राख में बदल रहा था, तब तुम कहाँ थे?