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Home»एलान विशेष

बिहार चंपारण: 80,000 मुस्लिम वोटर्स को लिस्ट से हटाने का सच | ढाका विधानसभा

adminBy adminOctober 1, 2025Updated:October 4, 2025 एलान विशेष No Comments4 Mins Read
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dhaka vidhan sabha
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बिहार के चंपारण में 80,000 मुस्लिम मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश

लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला?

परिचय
भारत में चुनावी लोकतंत्र की नींव मतदाता सूची है। लेकिन जब इस सूची से ही लाखों योग्य मतदाताओं को बाहर करने की साजिश की जाए, तो सवाल खड़े होते हैं कि क्या यह लोकतंत्र बचा रह पाएगा? बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के ढाका विधानसभा क्षेत्र में ऐसा ही एक बड़ा खुलासा हुआ है। यहाँ लगभग 80,000 मुस्लिम मतदाताओं को गैर-भारतीय नागरिक बताकर वोटर लिस्ट से हटाने की सुनियोजित कोशिश की गई है।


कौन चला रहा था यह खेल?

द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की तहकीकात में सामने आया कि:

  • पहला आवेदन: भाजपा विधायक पवन जायसवाल के निजी सहायक धीरज कुमार के नाम से स्थानीय निर्वाचन अधिकारी (ईआरओ) को दिया गया।
  • दूसरा आवेदन: भाजपा बिहार मुख्यालय के लेटरहेड पर पटना स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को भेजा गया।

दोनों आवेदनों में एक ही मांग थी: ढाका के 78,384 मुस्लिम मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटाया जाए। सूत्रों का कहना है कि यह सूची डिजिटल रूप से तैयार की गई थी, जिसमें मुस्लिम नामों को छांटकर अलग किया गया।


कानून क्या कहता है?

भारतीय कानून के मुताबिक, किसी मतदाता को हटाने के केवल तीन आधार हैं:

  1. वह मर चुका हो
  2. वह अब उस क्षेत्र में न रहता हो
  3. वह भारतीय नागरिक न हो

लेकिन ढाका में दी गई याचिकाओं में ऐसे किसी सबूत की बात नहीं की गई। सीधे तौर पर पूरे समुदाय को ‘गैर-भारतीय’ ठहराकर हटाने का प्रयास किया गया।


स्थानीय स्तर पर डर और गुस्सा

ढाका के कई गांवों में दहशत फैल गई है:

फुलवरिया पंचायत:

  • यहां भाजपा विधायक पवन जायसवाल का अपना गांव है
  • भाजपा ने यहां के 900 मुस्लिम मतदाताओं को “विदेशी” करार दे दिया
  • पंचायत सरपंच फिरोज आलम का नाम भी सूची में है

वे कहते हैं – “हम कई पीढ़ियों से यहीं रहते आए हैं। पंचायत चुनाव लड़ चुका हूं। अगर मैं भारतीय नहीं हूं तो फिर किस आधार पर चुनाव लड़ पाया?”

चंदनबारा गांव:

  • 5,000 से ज्यादा मुस्लिम मतदाताओं को सूची से हटाने का प्रस्ताव आया
  • यहां स्कूल शिक्षकों, बीएलओ तक के नाम हटाने की मांग की गई
  • एक स्कूल शिक्षिका ने कहा – “मेरी पोती को इस साल ही वोटर आईडी मिला है। उसका नाम भी सूची में है। क्या यह मज़ाक है?”

चुनावी गणित और ‘खतरा’

ढाका विधानसभा में:

  • कुल लगभग 2.08 लाख मतदाता हैं
  • 2020 के चुनाव में भाजपा ने राजद को सिर्फ 10,114 वोटों के अंतर से हराया था

अगर 78,000 मतदाता (यानी 40% से अधिक) लिस्ट से हटा दिए जाते, तो भाजपा के लिए चुनाव जीतना तय हो जाता।


भाजपा की सफाई और पलटवार

  • भाजपा विधायक पवन जायसवाल और उनके सहयोगियों ने इन आरोपों का सीधा जवाब नहीं दिया
  • उन्होंने उल्टा आरोप लगाया कि राजद ने 40,000 हिंदू मतदाताओं को हटाने की कोशिश की है
  • हालांकि, उन्होंने इसके कोई सबूत पेश नहीं किए
  • स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि केवल “गैर-नागरिक” हटाए जा रहे हैं

लेकिन शिकायतों की सूची से साफ है कि लगभग सभी मुस्लिम मतदाता इसमें नामित थे।


निर्वाचन आयोग की भूमिका संदिग्ध

  • मतदाता सूची से इतने बड़े पैमाने पर हटाने की मांग अपने आप में अभूतपूर्व है
  • निर्वाचन आयोग ने कहा कि इन नामों की जांच “नियमित सत्यापन” में होगी
  • लेकिन अब तक आयोग ने इस सुनियोजित हटाने की कोशिश करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की
  • न ही भाजपा की तरफ से इस कथित “जालसाजी” के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज हुई

विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की चुप्पी और लापरवाही ने लोगों के मन में यह विश्वास और पुख्ता कर दिया है कि राजनीतिक दबाव में मतदाता सूची से छेड़छाड़ हो रही है।


क्या है बड़ा सवाल?

ढाका की यह कहानी एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह सवाल पूरे भारतीय लोकतंत्र पर उठता है:

  • क्या वोटर लिस्ट से अल्पसंख्यकों को बड़े पैमाने पर हटाने की शुरुआत हो चुकी है?
  • क्या चुनाव आयोग राजनीतिक दबाव के आगे झुक रहा है?
  • और सबसे अहम – क्या लोकतंत्र की असली शक्ति, यानी “मतदान का अधिकार”, कुछ हाथों की साजिश का शिकार हो जाएगा?

निष्कर्ष

ढाका में 80 हज़ार मुस्लिम मतदाताओं को हटाने का प्रयास केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारत की चुनावी प्रक्रिया किस खतरे की ओर बढ़ रही है। अगर आयोग ने सख्ती से इसे नहीं रोका, तो यह “चुनाव” नहीं बल्कि “चयनित लोकतंत्र” बनकर रह जाएगा।

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