संघ से गुरुकुल तक: भगवा की आड़ में शोषण का साम्राज्य?
1. केरल आत्महत्या: एक आरएसएस पूर्व-सदस्य का गंभीर आरोप
- हाल के दिनों में केरल में एक 26 वर्षीय सॉफ़्टवेयर इंजीनियर की आत्महत्या ने देश को झकझोर दिया।
- मृत्यु से पहले छोड़ी गई कथित नोट-वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शिविरों में यौन शोषण और उत्पीड़न का शिकार रहे।
- उन्होंने कहा कि वर्षों तक चले मानसिक आघात ने उन्हें आत्महत्या के कगार तक लाकर खड़ा कर दिया।
- इस मामले ने एक व्यापक सार्वजनिक बहस को जन्म दिया है।
2. महाराष्ट्र गुरुकुल कांड: एक नाबालिग छात्रा का दर्द
- महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले के वारकरी गुरुकुल के प्रमुख भगवान कोकरे महाराज और एक शिक्षक पर एक नाबालिग छात्रा द्वारा यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगा है।
- पीड़िता के अनुसार, दाखिले के बाद कुछ दिनों में ही शारीरिक छेड़छाड़ और धमकियों की शुरुआत हो गई।
- आरोपों के बाद दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर, गिरफ्तारी की गई है।
- यह घटना गुरुकुलों जैसे संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
3. मध्य प्रदेश कॉलेज विवाद: एबीवीपी नेताओं पर अश्लील वीडियो बनाने का आरोप
- मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में महाराजा यशवंत राव होलकर सरकारी कॉलेज में यूथ फेस्टिवल के दौरान कुछ छात्र नेताओं ने छात्राओं का गुप्त वीडियो बनाया।
- आरोपितों में से तीन को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत भेजा गया।
- आरोपों के मुताबिक़ आरोपी एबीवीपी से जुड़े हैं।
- यह मामला छात्र परिसरों में सुरक्षा और नैतिकता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
4. एक साझा पैटर्न: उत्पीड़न — संरक्षण — और मौन
- ये तीनों घटनाएँ एक साझा धारा दिखाती हैं:
- (1) शक्तिशाली परिवेश: दुर्व्यवहार एक संगठित या शक्तिशाली परिवेश में हो रहा है।
- (2) पीड़ितों पर दबाव: पीड़ितों पर दबाव और डर कि आवाज़ उठाने पर उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा।
- (3) संस्थागत संरक्षण: जांच से पहले ही संस्थागत या राजनीतिक संरक्षण के संकेत मिलते हैं।
- केरल के इंजीनियर का मामला बताता है कि ये आरोप केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संरचनागत हो सकते हैं।
5. क्या विफल हो रही हैं व्यवस्थाएँ?
- बाल सुरक्षा, संस्थागत निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र स्पष्ट रूप से सतर्क नहीं हैं।
- जब आरोप किसी बड़े संगठन से जुड़े हों, तो जांच में पारदर्शिता और स्वतंत्रता विशेष रूप से ज़रूरी हो जाती है।
- सिर्फ़ गिरफ्तारी या बयानबाजी से काम नहीं चलेगा।
6. क्या चाहिए? — एक स्पष्ट आव्हान
- स्वतंत्र और पारदर्शी जांच: केंद्र व राज्य स्तर पर त्वरित और निष्पक्ष जांच की जाए।
- पीड़ित सुरक्षा और सहायता: पीड़ितों को त्वरित कानूनी, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता मिले।
- संस्थागत जवाबदेही: गुरुकुल और कॉलेजों को नियमित आडिट और सख्त चाइल्ड सेफ्टी प्रोटोकॉल के दायरे में लाया जाए।
- फोरेंसिक जांच: डिजिटल साक्ष्य (जैसे मोबाइल, सीसीटीवी) की निष्पक्ष और तेज़ जांच हो।
7. निष्कर्ष: शर्मनाक चुप्पी तोड़ी जानी चाहिए
- जब एक युवा इंजीनियर अपनी पीड़ा उजागर करता है और गुरुकुल/कॉलेजों से ऐसी खबरें आती हैं, तो यह साबित होता है कि यह व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक व्यापक समस्या है।
- अब सिर्फ़ बहस करने का नहीं, बल्कि त्वरित, निर्भीक और निष्पक्ष कार्रवाई का समय है।
- लोकतंत्र में कानून और मानवता की आवाज़ को सत्ता के संरक्षण के आगे दबने नहीं दिया जा सकता। पीड़ितों को न्याय मिलना ही होगा।
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