भारत के लोकतंत्र की रीढ़ अगर वोट है तो मतदाता सूची उसकी धड़कन है। लेकिन जब इस सूची से ग़ैर-क़ानूनी ढंग से नाम काटने के आरोप लगें, तो यह केवल चुनावी गड़बड़ी नहीं बल्कि सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला है।
कर्नाटक में बड़ा कदम: एसआईटी गठित:- कर्नाटक सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए पूरे राज्य स्तर पर जाँच का आदेश दिया है।
एडीजीपी बी.के. सिंह को एसआईटी का प्रमुख बनाया गया है। वही बी.के. सिंह जिन्होंने गौरी लंकेश हत्या और प्रज्वल रेवन्ना बलात्कार जैसे हाई-प्रोफ़ाइल मामलों की पड़ताल की थी। टीम को पूरे राज्य में मतदाता सूची से ग़ैर-क़ानूनी कटौती की जाँच का अधिकार दिया गया है। इतना ही नहीं, एसआईटी को इंडियन सिविल सिक्योरिटी कोड की धारा 2(यू) के तहत पुलिस स्टेशन का दर्जा भी मिला है।
इससे साफ़ है कि सरकार चाहती है कि आरोपों की तह तक पहुँचा जाए और किसी भी साज़िश का पर्दाफ़ाश हो।
राहुल गांधी का आरोप और चुनाव आयोग की चुप्पी:- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने खुले तौर पर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सीआईडी ने चुनाव आयोग से आवश्यक तकनीकी जानकारियाँ (जैसे आईपी एड्रेस और डेस्टिनेशन पोर्ट) माँगी थीं, लेकिन आयोग ने जवाब ही नहीं दिया।
अगर चुनाव आयोग ही पारदर्शिता से बचता दिखे तो जनता का भरोसा कैसे बचेगा?
अब सवाल: महाराष्ट्र क्यों बाहर रहे?:- कर्नाटक की तरह महाराष्ट्र में भी लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जाती है। कई इलाक़ों से शिकायतें हैं कि चुनाव से पहले ही बड़ी संख्या में नाम काट दिए जाते हैं। दलित और मुसलमान इलाक़ों में यह समस्या और ज़्यादा गंभीर बताई जाती है। विपक्षी दल समय-समय पर यह मुद्दा उठाते रहे हैं, लेकिन कभी भी इसे जाँच के स्तर तक गंभीरता से नहीं लिया गया। अगर कर्नाटक लोकतंत्र की रक्षा के लिए एसआईटी बना सकता है, तो महाराष्ट्र क्यों पीछे रहे?
विश्लेषण: मामला सिर्फ़ राज्य का नहीं, लोकतंत्र का है:- यह मुद्दा किसी एक राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश की चुनावी साख का है। अगर मतदाता सूची ही संदिग्ध है तो फिर चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़मी है। इससे न सिर्फ़ जनता का भरोसा टूटेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि पर असर पड़ेगा।
यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या यह सब योजनाबद्ध तरीके से “भाजपा का चुनावी फ़ायदा” सुनिश्चित करने के लिए हो रहा है?
निष्कर्ष: जाँच हर राज्य में होनी चाहिए:- कर्नाटक की पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन लोकतंत्र का तकाज़ा है कि ऐसी जाँच महाराष्ट्र समेत हर उस राज्य में होनी चाहिए जहाँ गड़बड़ी के आरोप उठते हैं। सिर्फ़ कर्नाटक ही नहीं, हर राज्य में वोटर लिस्ट का ऑडिट होना चाहिए — ताकि कोई भी मतदाता अपने अधिकार से वंचित न हो और चुनावों पर किसी साज़िश का साया न पड़े।