नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 19 से 24 वर्ष की उम्र के पांच मुस्लिम नौजवानों को
फिलिस्तीन के झंडे से मिलते-जुलते झंडे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को इस संबंध में शिकायत मिली थी कि
बिलासपुर के खुदीराम बोस चौक के करीब कुछ घरों पर फिलिस्तीनी झंडे लगे हुए हैं. इसके
बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शेख समीर बकाश (20) फिदेल खान (24) मोहम्मद
शोएब (23) शेख अजीम (19) और शेख समीर (22) को गिरफ्तार कर लिया.
इस संबंध में एसपी पूजा कुमार ने बताया कि पुलिस की एक टीम ने पांचों घरों का दौरा
किया था और उनकी छत से झंडे हटवा दिए. पांचों युवकों के खिलाफ भारतीय न्याय
संहिता (बीएनएस) की धारा 197 (2) के तहत मामला दर्ज किया है, जो देश की एकता को
खतरे में डालने वाले अपराधों से संबंधित है. दोषी पाए जाने पर इन युवकों को पांच साल
तक की जेल हो सकती है. याद रहे कि भारत खुद फिलिस्तीन का समर्थन कर रहा है, तो
ऐसे में क्या फिलिस्तीनी झंडा लगाना अपराध है?
समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार युवकों ने
जानकारी दी कि फिलस्तीनियों के साथ हो रहे कथित अत्याचार को देखकर उन्होंने उनके प्रति
सहानुभूति और एकजुटता दिखाने के लिए झंडे लगाए थे. उन्होंने यह भी बताया कि वे खुद
बाजार से कपड़े खरीदकर लाए और उन्हें सिलकर फिलिस्तीन के झंडे बनाए. पुलिस इस
मामले में आगे की जांच कर रही है.
उधर, बिलासपुर के महानिरीक्षक संजीव शुक्ला ने कहा कि आरोपियों ने जानबूझकर इलाके की
शांति भंग करने की कोशिश की और उस समय झंडे लगाए जब हिंदू और मुस्लिम, दोनों
समुदाय के लोग अपने त्योहार मना रहे थे.
शुक्ला से ये पूछे जाने पर कि जब भारत खुद फिलिस्तीन का समर्थन कर रहा है, तो ऐसे में
क्या फिलिस्तीनी झंडा लगाना अपराध है, तो उनका कहना था कि ये मामला आरोपियों के
इरादे पर दर्ज किया गया है. यानी महानिरीक्षक संजीव शुक्ला दिलों का हाल भी जानते हैं.
गौरतलब है कि गाजा पर जारी इजरायली हमले के बीच भारत ने फिलिस्तीन को लेकर
अपनी दीर्घकालिक नीति दोहराई है. फरवरी में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन
ने संसद को बताया था कि भारत सरकार ने तनाव को कम करने का आह्वान करने के साथ
ही बातचीत और कूटनीति के माध्यम से संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर ज़ोर दिया है.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस साल जनवरी में युगांडा के कंपाला में अपने फिलिस्तीनी
समकक्ष रियाद अल-मलिकी से मुलाकात की थी और समाधान के लिए भारत के समर्थन को
दोहराया था. इसके अलावा भारत ने जुलाई में फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र
राहत और कार्य एजेंसी को 2.5 मिलियन डॉलर का योगदान भी दिया था.
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएन) में भी भारत ने फिलिस्तीन का समर्थन किया था. फिलिस्तीन
संयुक्त राष्ट्र का स्थायी सदस्य बनाए जाने के योग्य है या नहीं इसे लेकर 10 मई को यूएन में
एक प्रस्ताव पेश किया गया था, जिस पर भारत समेत यूएन के 143 देशों ने फिलिस्तीन के
पक्ष में वोट किया था.
ज्ञात हो कि गाज़ा-इजरायल संघर्ष में अब तक 41,000 लोगों की जान जा चुकी है.