मध्य प्रदेश के मंदसौर में मुसलमानों ने एसपी को लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि
दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े 100 से अधिक लोगों ने न केवल मिलादुन्नबी स. के जुलूस(16
सितंबर) पर पथराव किया, बल्कि मुसलमानों के होटलों और रेस्तरां में तोड़फोड़ और लूटपाट
भी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के अन्य हिस्सों में कई मुसलमानों और उनकी संपत्तियों,
वाहनों पर एक साथ हमला किया गया या आग लगा दी गई। कुछ जगहों पर, आक्रामक भीड़
ने नुकसान पहुंचाने के इरादे से मुस्लिम इलाकों में घुसने की कोशिश की।
हेट डिटेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार, चार पन्नों की शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि दंगा
भड़काने के लिए यह एक पूर्व नियोजित हमला था। मंदसौर के काजी आसिफुल्लाह ने कहा,
“हमने घटना की सीसीटीवी फुटेज जमा कर दी है और उन हमलावरों के नामों की सूची भी
दी है जो दंगा भड़काना चाहते थे।”
उन्होंने हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और उनके नुकसान की भरपाई की मांग की है।
सीसीटीवी फुटेज और हमलावरों के नाम दिए जाने के बाद, हालांकि पुलिस का कहना है कि
वे मामले की जांच कर रही है।
अगर मामला इसके उलट होता तो अब तक एक भी आरोपी सांस नहीं ले पाता।
ज्ञात हो कि यह कथित घटना पड़ोसी जिला रतलाम में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित
करने के लिए निकाले गए जुलूस पर पथराव और 7 सितंबर को प्रदर्शनकारी हिंदू संगठनों पर
पुलिस लाठीचार्ज में एक व्यक्ति की कथित मौत के आरोपों के ठीक एक सप्ताह बाद हुई।
सियासत वेबसाइट की खबर के अनुसार, हैदराबाद में भी ईद मिलादुन्नबी स. के जुलूस पर
कथित तौर पर पत्थर फेंकने के चलते पांच लोग घायल हो गए। एक इमारत और एक गली
से जुलूस पर पत्थर फेंकते लोगों का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो
गया। स्थानीय लोगों ने हैदराबाद पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने सांप्रदायिक रूप से
संवेदनशील क्षेत्र माने जाने के बावजूद बिना किसी पुलिस बंदोबस्त के जुमेरात बाजार इलाके
से जुलूस को गुजरने दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, शाम पांच बजे मिलादुन्नबी स. के जुलूस के लिए चारमीनार और उसके
आसपास करीब एक लाख लोग इकट्ठा हुए थे, जिसके कारण पुलिस को भगदड़ रोकने के लिए
इलाके की घेराबंदी करनी पड़ी।
हम पहले भी ये कह चुके हैं कि अगर पुलिस चाहे तो ऐसे सभी घटनाओं को आसानी से
रोका जा सकता है। हिन्दू जुलूसों को मुस्लिम इलाकों से और मुस्लिम जुलूसों को हिन्दू
इलाकों से गुजरने की बिलकुल इजाज़त ना दी जाये लेकिन पहले तो पुलिस उन्हें इजाज़त
देती है फिर उन्हें रोकने में भी नाकाम रहती है।