उमा, जिनके 19 वर्षीय बेटे आर्यन मिश्रा की हत्या कथित गौरक्षकों (हिंदुत्ववादी गुंडों) से जुड़े
लोगों द्वारा की गई थी, ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “उन्होंने मेरे बेटे को इस सोच के
साथ गोली मारी कि वह मुसलमान है। क्या मुसलमान इंसान नहीं हैं, क्या वे हमारे भाई नहीं
हैं? आप मुसलमान को क्यों मारेंगे? मुसलमान हमारी रक्षा करते हैं।”
23 अगस्त को हरियाणा के पलवल ज़िले में NH-19 पर गदपुरी टोल प्लाजा के पास आर्यन
को सिर और दाहिने कंधे में गोली मार दी गई थी, जब कथित गौरक्षकों (हिंदुत्ववादी गुंडों)
ने उसका लगभग 50 किलोमीटर तक पीछा किया था। उमा का यह बयान आरोपी अनिल
कौशिक द्वारा आर्यन के पिता सियानंद मिश्रा से कथित तौर पर यह कहने के बाद आया है
कि उनके बेटे के हत्यारे को लगता था कि आर्यन मुसलमान है और अब उसे एक ब्राह्मण की
हत्या का पछतावा है। फरीदाबाद की स्थानीय जेल में अनिल कौशिक से मिलने गए सियानंद
मिश्रा ने कहा, “उसने(अनिल कौशिक) कहा कि उसे लगता था कि मेरा बेटा मुसलमान है।
अब उसे एक ब्राह्मण की हत्या का पछतावा है।”
द प्रिंट ने मिश्रा के हवाले से लिखा, “मैंने कौशिक से पूछा, ‘तुम मुसलमान को क्यों मारोगे?
सिर्फ़ एक गाय की वजह से?’ तुम कार के पहिए पर गोली मार सकते थे या पुलिस को बुला
सकते थे। क़ानून को अपने हाथ में क्यों लेना?’ कौशिक के पास कोई जवाब नहीं था।” कौशिक
को आस-पास के इलाके में “फरीदाबाद के मोनू मानेसर” के रूप में जाना जाता है। वह
अपने मुस्लिम विरोधी कार्यों के लिए मशहूर है और हिंदुत्व समूह बजरंग दल का सदस्य है।
आर्यन 23 अगस्त की आधी रात को अपने दोस्तों हर्षित और शैंकी के साथ डस्टर कार में
घूमने के लिए निकला था।
आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ “मवेशी
तस्कर” डस्टर और फॉर्च्यूनर एसयूवी से शहर में चौकसी कर रहे हैं। कट्टरपंथी लोगों ने
गोलियां चलाईं और एक गोली आर्यन की गर्दन के पास लगी। दूसरी गोली आर्यन के सीने में
लगी। आर्यन को पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन एक दिन बाद उसकी मौत हो गई।
आरोपियों की पहचान अनिल कौशिक, वरुण कुमार, कृष्ण कुमार, आदेश सिंह और सौरव कुमार
के रूप में हुई है। इन आरोपियों को भारतीय दंड संहिता, 2023 की धारा 103(1) (हत्या की
सजा), 190 (अवैध सभा) और 191(3) (घातक हथियारों से लैस) के तहत गिरफ्तार किया
गया है। उधर आर्यन मिश्रा के परिवार से मिलने के बाद गुरुवार (5 सितंबर) को भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) की नेता बृंदा करात ने दावा किया कि पुलिस ने
पीड़ित परिवार के सामने हत्या के आरोपी को ‘अच्छा इंसान’ बताया है.द हिंदू की खबर के
मुताबिक, बृंदा ने कहा, ‘ये हैरान करने वाली बात है कि परिवार ने हमारे प्रतिनिधिमंडल को
बताया कि पुलिस आरोपियों को अच्छा इंसान बता रही है और कह रही है कि उन्होंने इस
घटना को गलती से अंजाम दिया है.’बृंदा ने आगे शासन-प्रशासन पर हमला बोलते हुए
सवाल किया कि ये पुलिस द्वारा परिवार को किस तरह का संदेश दिया जा रहा है? उन्होंने
यह भी आरोप लगाया कि आरोपी हरियाणा सरकार द्वारा स्वीकृत गोरक्षकों की जिला समिति
टीम का हिस्सा हैं. बृंदा ने कहा, ‘ये तथाकथित गोरक्षकों के एक गिरोह द्वारा निर्मम हत्या
हरियाणा सरकार की मंजूरी और पुलिस की मिलीभगत का सीधा परिणाम है. और यही
कारण है कि एक भी सरकारी अधिकारी या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता ने शोक
संतप्त परिवार से मिलने की जहमत नहीं उठाई.’माकपा नेता ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी से
कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर भीड़ का शासन हावी हो गया है. कोई 30 किलोमीटर तक
किसी का पीछा करते हुए उसे गोली मारकर चला जाता है. वह भी वहां, जहां हर तरफ
कैमरा लगा है. ऐसे में पुलिस क्या कर रही थी.बृंदा ने बताया कि परिवार ने सरकार से
न्याय, नौकरी और मुआवजे की मांग की है.गौरतलब है कि बीते 23 अगस्त को हरियाणा के
फरीदाबाद में 12वीं कक्षा के छात्र आर्यन को राज्य के गढ़पुरी के पास कथित गोरक्षक समूह के
सदस्यों ने पीछा कर गोली मार दी थी. पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ़्तार
किया है.यह घटना दिल्ली-आगरा हाईवे पर हुई थी, जहां आरोपियों ने पीड़ित लड़के की कार
का करीब 30 किलोमीटर तक पीछा किया थी. गोरक्षक समूह के सदस्यों की पहचान अनिल
कौशिक, वरुण, कृष्णा, आदेश और सौरभ के रूप में हुई है.पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि
पीड़ित की हत्या के लिए इस्तेमाल किया गया हथियार भी अवैध था. सभी आरोपी पुलिस
की हिरासत में हैं और मामले की आगे की जांच चल रही है.मालूम हो कि इससे पहले
सामने आया था कि 27 अगस्त को हरियाणा के चरखी दादरी जिले में गोरक्षकों के एक समूह
ने गोमांस खाने के संदेह में एक 23 वर्षीय बंगाली प्रवासी मजदूर की कथित तौर पर पीट-
पीटकर हत्या कर दी थी. आरोपियों ने एक अन्य प्रवासी, असम के मूल निवासी असीरुद्दीन को
भी पीट-पीटकर घायल कर दिया था.