प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 अगस्त) को महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के राजकोट किले में स्थापित
छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा गिरने पर माफी मांगी.
मुंबई के बाहरी इलाके पालघर में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘छत्रपति शिवाजी महाराज
सिर्फ एक राजा नहीं बल्कि हमारे आराध्य देव हैं.’
मोदी 76,000 करोड़ रुपये की वधावन बंदरगाह परियोजना के शुभारंभ के लिए शहर में थे.
पिछले साल दिसंबर में मोदी ने तटीय महाराष्ट्र में शिवाजी की 35 फीट ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन किया
था. नौ महीने से भी कम समय में सोमवार (26 अगस्त) को प्रतिमा ढह गई.
महाराष्ट्र में सभी दलों में पूज्यनीय शिवाजी की प्रतिमा का विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले ढह
जाना राज्य की भाजपा नीत महायुति सरकार के लिए अच्छी खबर नहीं है.
नुकसान को कम करने के किसी भी प्रयास ने भाजपा को और अधिक विवाद में डाल दिया है, जिससे उसे
शर्मिंदगी उठानी पड़ी है. घटना के तुरंत बाद विपक्ष ने सरकार की आलोचना की और जवाबदेही की मांग
की.
यह प्रतिमा भाजपा नेता नारायण राणे के गृह क्षेत्र में बनाई गई थी. परंपरागत रूप से यह सीट शिवसेना
के उद्धव ठाकरे गुट की थी, लेकिन इस साल के संसदीय चुनाव में ठाकरे की शिवसेना यह सीट राणे से हार
गई.
मूर्ति गिरने के बाद आदित्य ठाकरे मौके पर पहुंचे. ठाकरे गुट के कार्यकर्ताओं और राणे के लोगों के बीच
झड़प हुई, जिससे हंगामा मच गया. पुलिस भीड़ को तितर-बितर करने में विफल रही.
राणे को कैमरे पर महाविकास अघाड़ी- शिवसेना (यूबीटी), शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस
पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस का गठबंधन- के नेताओं को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते हुए देखा
गया. यहां तक कि उन्होंने पार्टी के नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं को जान से मारने की भी धमकी दी.
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नौसेना पर दोष मढ़ने की कोशिश की, यह कहते हुए कि ‘इसके (प्रतिमा
के) निर्माण और स्थापना के लिए जिम्मेदार लोगों ने तेज़ हवा की गति जैसे महत्वपूर्ण कारकों को
नजरअंदाज किया होगा और इस्तेमाल की गई सामग्रियों की गुणवत्ता से समझौता किया होगा.’
हालांकि, सोमवार को मूर्ति गिरने के तुरंत बाद दर्ज की गई एफआईआर कुछ और ही इशारा करती है.
महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने ठेकेदार जयदीप आप्टे और संरचनात्मक सलाहकार चेतन
पाटिल का नाम एफआईआर में दर्ज किया है और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुरू में नौसेना को दोषी ठहराया लेकिन बाद में माफ़ी मांगी. उन्होंने यहां तक
घोषणा की कि उसी स्थान पर एक ‘बड़ी प्रतिमा’ स्थापित की जाएगी.
हालांकि, अजित पवार मौजूदा सरकार का हिस्सा हैं, लेकिन उन्होंने खुद को अन्य दो नेताओं से अलग कर
लिया और घटना की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने प्रतिमा ढहने के लिए जिम्मेदार लोगों के
खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की.
दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार वर्तमान सरकार में उपमुख्यमंत्री भी हैं.
बहरहाल, शुक्रवार को वधावन बंदरगाह के उद्घाटन के अवसर पर महायुति के तीनों दलों के नेता मौजूद थे,
जहां उन्होंने एक स्वर में बात की और राज्य में देश का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह बनाकर ‘महाराष्ट्र की
प्रगति सुनिश्चित करने’ के लिए मोदी की प्रशंसा की.
वधावन बंदरगाह के उद्घाटन समारोह को भाजपा और उसके सहयोगियों – शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना
और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी – के लिए एक महत्वपूर्ण चुनाव-पूर्व संपर्क कार्यक्रम के रूप में
देखा गया. बंदरगाह पर 1997 से ही बातचीत चल रही है और स्थानीय मछुआरा समुदाय की ओर से इसे
विरोध का सामना करना पड़ा है. ठाकरे लंबे समय से परियोजना का विरोध करने वाले मछुआरों के
समर्थन में हैं.
वधावन बंदरगाह के उद्घाटन समारोह को प्रतिमा ढहने की घटना ने हाईजैक कर लिया. इस कार्यक्रम में
बोलने वाले हर नेता ने शिवाजी का जिक्र किया और मोदी ने इस अवसर का इस्तेमाल इस घटना का
राजनीतिकरण करने के लिए किया.
अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए लोगों को गुमराह करते हुए कहा कि उनकी पार्टी की संस्कृति
ऐसी है कि जब कोई गलती होती है तो वह और उनकी पार्टी के सदस्य माफी मांगने को तैयार रहते है.
जब से भाजपा की मोदी सरकार सत्ता में आई है इनका काम कम और गलतियां इतनी हैं की गिनाना भी
मुश्किल है आज तक इन्होंने किसी गलती के लिए माफी नहीं मांगी और न ही माफी मांगते हुए कभी देश ने
इन्हें देखा और फिर भी यह कहते हैं “उनकी पार्टी की संस्कृति ऐसी है कि जब कोई गलती होती है तो वह
और उनकी पार्टी के सदस्य माफी मांगने को तैयार रहते है.”
उन्होंने कहा, ‘मैं उन सभी लोगों से भी माफ़ी मांगता हूं जो छत्रपति शिवाजी महाराज को अपने पूज्य
देवता के रूप में पूजते हैं. मुझे पता है कि उनकी भावनाएं भी आहत हुई हैं.’
मोदी ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर का भी जिक्र किया और दावा किया कि विपक्ष ने
बार-बार ‘महान देशभक्त’ का अपमान किया है और इसके लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बगैर मोदी ने एक घटना का जिक्र किया, जिसमें
गांधी ने मार्च 2023 में लंदन में भारतीय प्रवासियों के समक्ष भाषण में सावरकर की आलोचना की थी.
गांधी द्वारा अपने बयानों के लिए माफी मांगने से इनकार करने के कारण उनके खिलाफ पुणे में आपराधिक
मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था.
मोदी ने कहा, ‘विपक्षी नेता अदालती मामलों का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन माफी मांगने से
इनकार कर रहे हैं.’
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया
देते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति ढहने के लिए सिर्फ माफी मांगना पर्याप्त नहीं होगा,
क्योंकि इस घटना ने महाराष्ट्र के गौरव को ठेस पहुंचाई है.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पटोले ने संवाददाताओं से कहा, ‘उन्हें माफी मांगने की क्या जरूरत
थी? इसका मतलब है कि उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्होंने गलती की थी. जब प्रतिमा बनकर तैयार हो
गई थी, तो प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें या उनकी टीम को यह जांच करनी चाहिए थी कि प्रतिमा ठीक है
या नहीं, नींव मजबूत है या नहीं और संस्कृति निदेशक से प्रमाण पत्र मांगा गया था या नहीं.’
पटोले ने कहा, ‘माफी मांगकर इस मुद्दे का समाधान नहीं किया जा सकता. चाहे वह प्रधानमंत्री हों,
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हों या उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार हों, उन्होंने महाराष्ट्र के
गौरव को ठेस पहुंचाई है. उन्हें सत्ता से हट जाना चाहिए, अन्यथा राज्य की जनता उन्हें बाहर कर देगी.’
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अनावरण के लिए जल्दबाजी में प्रतिमा स्थापित
कर दी.
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख ने कहा कि यह काम एक अनुभवहीन व्यक्ति को सौंपा गया था और
प्रतिमा के संबंध में सांस्कृतिक विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों की अनदेखी की गई, जिसके परिणामस्वरूप
घटिया काम हुआ और वह ढह गई.