एलान के 25 वर्ष पूरे होने पर एक नया क़दम
आज से पूरे 25 साल पहले यानी 23 अक्तूबर 2000 को लातूर शहर से साप्ताहिक एलान की यात्रा शुरू हुई थी। उस
वक़्त मक़सद था – अल्पसंख्यकों में सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक जागरूकता पैदा करना, उन्हें अपने हक़ों
के लिए तैयार करना और उनकी समस्याओं के हल के लिए मज़बूत आवाज़ बनना।
यह सफर आसान नहीं था, लेकिन अल्लाह के फ़ज़्ल व करम और आप लोगों की दुआओं और मदद से एलान ने यह
साबित किया कि अगर इरादा नेक और जज़्बा सच्चा हो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं।
इन 25 सालों में एलान सिर्फ़ एक अख़बार नहीं रहा, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है। यह आंदोलन अल्पसंख्यकों के
हक़, उनकी आवाज़ और उनकी इज़्ज़त की हिफाज़त का प्रतीक है। आज एलान सिर्फ़ लातूर तक सीमित नहीं, बल्कि
पूरे महाराष्ट्र में अपनी मज़बूत पहचान बना चुका है।
25 साल की अहम उपलब्धियां:- 1. एलान मराठवाड़ा का पहला अख़बार बना जिसे राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र
सरकार से भी विज्ञापन मिले।
- एलान ने अख़बार को आंदोलन का रूप देकर समाज के मुद्दों को आवाज़ दी और मज़लूमों के लिए “धड़कन” बन
गया। - एलान ने कई नए अख़बारों और पत्रकारों को जन्म दिया, लिहाज़ा इसे “मराठवाड़ा के अख़बारों की जननी” भी कहा
जाना ग़लत नहीं। - 2006 से शुरू हुआ एलान का इस्लामी कैलेंडर आज उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में लोकप्रिय है और महाराष्ट्र के
साथ-साथ पड़ोसी राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्रा प्रदेश में भी पहुंच चुका है।
नए दौर की तरफ़ कदम:- समाज बदल रहा है, दुनिया बदल रही है और मीडिया की रफ़्तार भी बदल चुकी है। सोशल
मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने अख़बार पढ़ने की आदत को काफ़ी हद तक बदल दिया है। इसी बदलते वक़्त के
साथ एलान ने अब अपने 25वें साल पर एक नया क़दम उठाया है – अपना न्यूज़ पोर्टल
elaannews.com/elaannews.in और न्यूज़ चैनल elaannews शुरू करके।
अब एलान सिर्फ़ काग़ज़ के पन्नों तक नहीं रहेगा, बल्कि मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में भी हर घर तक पहुंचेगा।
आज आप चाहे भारत के किसी भी कोने में हों या दुनिया के किसी भी शहर में – एलान की खबरें आपकी उंगलियों की
पहुंच में होंगी।
एक अहम पैग़ाम:- दोस्तों, इस मौके पर हमें सिर्फ़ अपनी कामयाबी पर खुशी मनाने के बजाय अपने फ़र्ज़ को भी याद
रखना है। मुल्क और क़ौम इस वक़्त कई इम्तिहानों से गुज़र रहे हैं –
- कभी आर्थिक संकट।
- कभी नफ़रत की सियासत।
- कभी बेरोज़गारी और महंगाई।
ऐसे में एलान का मक़सद और भी बड़ा हो जाता है –सिर्फ़ खबर देना नहीं, बल्कि हक़ की आवाज़ बुलंद करना,
नाइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ खड़ा होना और समाज को एकजुट रखना।
शुक्रिया और दुआ:- हम अल्लाह के शुकरगुज़ार हैं कि उसने हमें यह 25 साल की कामयाबी दी। साथ ही हम अपने
पाठकों, संवाददाताओं, एजेंटों, विज्ञापनदाताओं और तमाम दोस्तों ख़ुसूसन अमन कमेटी के उन मेम्बरों का भी
शुक्रिया अदा करते हैं, जिनकी वजह से एलान आज इस मुक़ाम पर पहुंचा। हमारी दुआ है कि अल्लाह तआला एलान
को और तरक़्क़ी दे, इसे मज़लूमों की आवाज़ बनाए रखे और मुल्क व मिल्लत की हिफ़ाज़त फ़रमाए। एलान सिर्फ़
अख़बार नहीं… बल्कि एक सच्चा आंदोलन है, और रहेगा।