ये पत्रकार नहीं गद्दारी हैं
काँग्रेस की सत्ता में जब पाकिस्तानी आतंकवादियों ने देश पे हमला किया था तो “मोदी जी कहते थे: ’56 इंच का सीना चाहिए पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए!’ ‘कांग्रेस सरकार कमज़ोर है, सिर्फ़ बयानबाज़ी करती है!’ रैलियों में कहते थे — ‘अगर मैं पीएम होता, तो 10 सिर के बदले 100 सिर काटकर लाता!’ लेकिन अब क्या हुआ? जब पुलवामा हुआ — पहले चुनावी रैली में भाषण, फिर बालाकोट पर सवाल उठे। अब जब नकली युद्ध का माहौल गोदी मीडिया ने बनाया —तो सब चुप! क्या देशभक्ति सिर्फ़ माइक पर बोलने और चुनाव जीतने का टूल है? “देशभक्ति की सस्ती नारेबाज़ी करने वाले अब सत्ता में हैं —तो जवाब दें: देश का हर नागरिक विशेष कर मुस्लिम समाज चाहता है कि पाकिस्तान को नक़्शे से मिटा दो तो मोदीजी आप पीछे क्यों हट रहे हो ? अगर सेना की कमी हो तो आरएसएस के 30 लाख सैनिक तय्यार हैं हथियारों के साथ, लगता है इन्हीं सैनिकों को लेकर आपका मीडिया पाकिस्तान पर कब्ज़ा कर चूका है ? दोस्तों भाजपा सरकार और गोदी मिडिया ने मिलकर पुरे देश को मुर्ख बनाया है। इतने धड़ल्ले के साथ झूठ परोसता रहा गोदी मीडिया और सब खामोश तमाशा देखते रहे, आखिर गोदी मीडिया ने ये झूठ क्यों और किसके कहने पे फ़ैलाया था ? बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के इन्होंने क्यों और किसके कहने पर ऐसी ब्रेकिंग न्यूज़ चला दी- कि ‘पाकिस्तान पर मिसाइल हमला’ ‘भारत की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक’ ‘तीसरा विश्व युद्ध शुरू!’ लेकिन सच क्या था? ऐसी कोई आधिकारिक सूचना नहीं थी सेना ने भी इन खबरों का खंडन किया इतना ही नहीं एक भारतीय “शहीद को आतंकवादी बता दिया, इन्हें थोड़ी भी शर्म नहीं आती?” पाकिस्तान की ओर से हुई गोलीबारी में पुंछ, जम्मू-कश्मीर के कारी मोहम्मद इकबाल — एक मौलवी, एक शिक्षक, एक नागरिक शहीद हो गए लेकिन…क्या दिखाया गोदी मीडिया ने ? कि इकबाल साहब आतंकवादी थे। उनकी तस्वीरें चलाई गईं, उन्हें ‘लश्कर’ से जोड़ा गया, बिना सोचे समझे, एक शहीद शिक्षक को आतंकवादी बना डाला। अगर पुंछ पुलिस ये न कहती कि“ये खबरें पूरी तरह झूठी और भ्रामक हैं।“कारी इकबाल एक सम्मानित नागरिक और शिक्षक थे।”उनके गांव के लोग, उनके मदरसे के छात्र, उनके समुदाय के नेता —सब इस झूठ से आहत हैं। तो एक शहीद के माथे पर तो आतंकवाद का ठप्पा लग जाता। किसने दिया ये झूठ? ये कैसी पत्रकारिता है? जो एक निर्दोष की मौत पर भी TRP की रोटी सेंकती है? वरिष्ठ नेता तक बोले — “ये ज़हर फैलाने वाले दिल्ली में बैठे लोग असली देशद्रोही हैं।” इन हराम खोर चैनलों की ढिटाई तो देखिए किसीने कोई माफ़ी तक नहीं मांगी। कोई सुधार नहीं छापा।”स्थानीय लोग, नेता, यहां तक कि बीजेपी के नेता ने भी इस झूठ की निंदा की है। फिर भी चैनल माफी तक नहीं मांगते!” जिस मीडिया को जनता की आवाज़ बनना था, वो सत्ता के तलवे चाट रहा है। जो शहीद हुए… उन्हें आतंकवादी कहकर बदनाम कर रहा है! सच्चे देशभक्तों को बदनाम कर झूठी कहानियाँ सुनाना —ये पत्रकारिता नहीं…ये गद्दारी है। सवाल उठाइए! वरना कल आपकी आवाज़ भी “राष्ट्रद्रोह” बन जाएगी। अब वक़्त है सवाल पूछने का:”जब सच्चाई को दबाया जाता है, और झूठ को खबर बना दिया जाता है… तो हमें बोलना पड़ेगा !” अगर गोदी मीडिया झूठ फैला रहा है, तो प्रधानमंत्री मोदी ने खुद क्यों चुप्पी साध रखी है? “प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार कहा है —’न्यू इंडिया में नफ़रत और अफ़वाह के लिए कोई जगह नहीं होगी।’ ‘देश को जोड़ने वाली बातें होनी चाहिए, तोड़ने वाली नहीं।’ लेकिन क्या उन्होंने अपने समर्थक चैनलों को रोका? क्या उन्होंने उन ऐंकरों को चेताया जो झूठे युद्ध की खबरें फैला रहे थे? क्या उन्होंने फेक न्यूज़ फैलाने पर किसी चैनल को कार्रवाई की धमकी दी? नहीं ना ! क्योंकि गोदी मीडिया उन्हीं के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। जब मीडिया बेरोजगारी की बात करने लगेगा, तब सरकार को जवाब देना पड़ेगा। इसलिए ध्यान भटकाने के लिए गोदी मीडिया को खुली छूट मिलती है। सवाल पूछना देशद्रोह नहीं है — जिम्मेदार नागरिकता है। “अगर मोदी जी सच में ‘सबका साथ, सबका विकास’ चाहते तो पहले सच का साथ देते। गोदी मीडिया पर लगाम लगाते, जो देशहित में जरूरी है —ना कि सिर्फ सत्ता की रक्षा के लिए चुप रहते।” “अब सवाल ये है कि इन चैनलों के खिलाफ आप क्या कर सकते हैं? 1. इन चैनलों को देखना बंद करो 2. TV और YouTube पर इन्हें व्यूज़ मत दो — TRP की सांसें वहीं से आती हैं. 3 . इनकी ब्रांड्स को टैग कर बहिष्कार की मांग करो. 4. जो कंपनियाँ इनके शो में ऐड देती हैं, उनसे सवाल पूछो- ‘आप झूठ फैलाने वालों को फंड क्यों दे रहे हैं?’ 5 . वैकल्पिक मीडिया को सपोर्ट करो. 6 . कानून का सहारा लो, Press Council of India और Broadcasting Complaints Council में शिकायत दर्ज करो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ईमेल/RTI के ज़रिए जवाबदेह बनाएं” “जब कोई आम नागरिक झूठ फैलाता है तो उसे ‘फेक न्यूज़ फैलाने’ के जुर्म में जेल भेजा जाता है तो पत्रकार क्यों छूट जाए? भारतीय दंड संहिता की धारा 505 और 153A के अंतर्गत: अगर कोई जाति, धर्म या राष्ट्र के खिलाफ हिंसा या नफ़रत फैलाता है या अफ़वाह फैलाकर शांति भंग करता है तो ये दंडनीय अपराध है। तो सवाल है — क्या गोदी मीडिया इन कानूनों से ऊपर है?” “देश तभी बचेगा जब मीडिया बिकेगा नहीं। गोदी मीडिया को ‘बॉयकॉट’ नहीं, बंद करना है — कानून, सोशल बहिष्कार और जन-जागरूकता के ज़रिए। अब सवाल पूछने का वक्त है — वरना कल ये झूठ आपके घर जला देगा।” वैसे देश के एक लाल, देशभक्त और सुप्रीम कोर्ट के वकील मेहमूद पराचा इन देशद्रोह चैनलों के खिलाफ याचिका दायर कर रहे हैं। चुप रहना अब अपराध है। “सच बोलना पत्रकारिता है। झूठ फैलाना प्रोपेगेंडा। फैसला अब आपको करना है। जय हिंद!”