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Home»महाराष्ट्र

औरंगाबाद में AIMIM का ‘आंतरिक विस्फोट’

adminBy adminJanuary 7, 2026 महाराष्ट्र No Comments3 Mins Read
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महाराष्ट्र के औरंगाबाद- छत्रपति संभाजीनगर इन दिनों सिर्फ़ चुनावी सरगर्मियों का नहीं, बल्कि राजनीतिक
अराजकता, नैतिक सवालों और खुले टकराव का केंद्र बन चुका है। AIMIM के भीतर मची हिंसक गुटबाज़ी के कारण
पार्टी सांसद और प्रमुख चेहरा इम्तियाज जलील की कार पर उन्हीं के कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया, ये सिर्फ़ एक
आंतरिक झगड़ा नहीं है। यह उस राजनीति का आईना है, जो ज़मीन पर नियंत्रण खो चुकी है और भीतर से सड़ने लगी
है। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

टिकट बंटवारा या सत्ता का अहंकार?

बताया जा रहा है कि यह पूरा बवाल टिकट बंटवारे को लेकर हुआ। स्थानीय
नेताओं का आरोप है कि इम्तियाज जलील “वन-मैन शो” की तरह फ़ैसले थोप रहे हैं, जिसकी वजह से जो कार्यकर्ता कल तक उनके लिए नारे लगा रहे थे, वही आज हाथापाई पर उतर आए। यह वही क्षण है जब कोई पार्टी अपने सबसे नाज़ुक दौर में होती है, जब विरोधी बाहर नहीं, दुश्मन भीतर खड़े होते हैं। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, हालात क़ाबू में आए, लेकिन सवाल क़ाबू में नहीं आए।

नोटों की बारिश: राजनीति या खुला तमाशा?

इस घटना से ठीक दो दिन पहले AIMIM की एक रैली में नोटों की बारिश का वीडियो वायरल हुआ था। खुलेआम उड़ते नोट, कैमरों में क़ैद होती तस्वीरें और सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलते इस वीडियो ने AIMIM की नैतिक राजनीति के दावों को ज़मीन पर पटक दिया।


विपक्ष ही नहीं, आम नागरिकों ने भी सवाल उठाए कि क्या यह चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन नहीं? क्या यह
मतदाताओं को लुभाने की कोशिश नहीं? और सबसे अहम -अगर यह सब AIMIM की रैली में हो रहा है, तो नेतृत्व की ज़िम्मेदारी किसकी है? इम्तियाज जलील ने सीधे तौर पर इस पर कोई ठोस सफ़ाई नहीं दी, लेकिन चुप्पी भी राजनीति में एक बयान होता है। समर्थक उन्हें “अल्पसंख्यकों की आवाज़” कहते हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह आवाज़ अब राजनीतिक अवसरवाद में बदलती दिख रही है।

साड़ी ऑफर और भगदड़

जनता को सस्ते लालच में उलझाने की राजनीति?
औरंगाबाद में हाल ही में 5000 की साड़ी 599 रुपये में मिलने की खबर पर मची भगदड़ में बच्चे दबे, महिलाएं बेहोश
हुईं क्या ये भी इसी माहौल की उपज है। यह सवाल पूछना ज़रूरी है कि क्या शहर को लगातार ‘लालच आधारित राजनीति’ का प्रयोगशाला बनाया जा रहा है? नोटों की बारिश, सस्ते ऑफर, भावनात्मक नारे और बदले में वोट की उम्मीद।

AIMIM की साख पर सीधा हमला

AIMIM खुद को “सिस्टम से लड़ने वाली पार्टी” बताती है। लेकिन जब पार्टी के
भीतर ही हिंसा हो। नेता अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं से असुरक्षित हों। रैलियों में नोट उड़ें और नेतृत्व पर सवालों
की बाढ़ हो तो यह साफ़ हो जाता है कि लड़ाई सिस्टम से नहीं, कुर्सी के लिए हो रही है।

राजनीति का पतन या चेतावनी? औरंगाबाद की यह घटना सिर्फ़ इम्तियाज जलील की कार पर हमला नहीं है। यह
हमला है AIMIM की आंतरिक एकता पर, उसके नैतिक दावों पर और उस राजनीति पर, जो खुद को ‘विकल्प’ बताती
थी। आज सवाल यह नहीं कि किस गुट ने हमला किया, सवाल यह है कि क्या AIMIM और इम्तियाज जलील अपनी
राजनीति को आत्ममंथन के कटघरे में खड़ा करने को तैयार हैं? अगर नहीं तो औरंगाबाद की यह हिंसा सिर्फ़ शुरुआत
है, अंत नहीं।

Also Read : सीरिया पर फिर पश्चिमी बम्बारी

Also Raed : वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमला लोकतंत्र नहीं, खुली गुंडागर्दी है!

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