5 सितंबर को ईद मिलादुन्नबी थी लेकिन 6 सितंबर को गणपति विसर्जन था और 6 सितंबर तक महाराष्ट्र के हर गांव हर शहर और गली मोहल्लों में गणपति बैठे हुए थे लिहाज़ा कोई शरारती सांप्रदायिक मानसिकता वाले लोग इस मौके का फायदा न उठाएं इसलिए महाराष्ट्र के कई ज़िलों में ईद मिलादुन्नबी का जुलुस,रैली 7 और 8 तारीख को मनाया गया। कल यानी 7 सितंबर को लातूर में भी मोटर सायकल रैली का आयोजन किया गया था और आज यानी 8 सितंबर को जुलूस का आयोजन किया गया था इसमें भी शहर से हज़ारों की तादाद में मुसलमानों ने शरीक होकर अपनी एकता का सबूत दिया शहर की सड़कों पर कल उस रैली का जनसैलाब उमड़ पड़ा था तो आज इस जुलूस की रौनक ने सभी को आकर्षित किया। कल की रैली और आज के जुलूस की सबसे खास बात ये रही की इसमें सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में बौद्ध और हिन्दू धर्म के लोगों ने भी हिस्सा लेकर धर्म और ज़ात के नाम पर सांप्रदायिकता फ़ैलाने वालों के मुंह पर करारा तमाचा मार कर ये साबित किया कि इस देश विशेषकर इस शहर लातूर की एकता और अखंडता को तोडना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। इसी वजह से कल की मोटरसायकल रैली और आज के जुलूस में सिर्फ हरे नहीं बल्कि नीले, भगवे, पीले और सफ़ेद भी झंडे लहरा रहे थे। कल की मोटरसायकल रैली और आज के जुलूस ने सिर्फ अमन व शांतता का ही नहीं बल्कि एकता अखंडता और भाई चारे का भी पैगाम दिया है।
शहर और ज़िले में गणेश चतुर्थी से लेकर ईद मिलादुन्नबी के जुलूस तक नज़र आयी अमन व शांतता को बनाये रखने का सबसे बड़ा सहरा जिले के पुलिस अधीक्षक अमोल तांबे और पुलिस महकमे के सर भी जाता है जिन्होंने कड़ी मेहनत की।