#ILoveMuhammad Protest: मौलाना तौकीर रज़ा गिरफ़्तार, पुलिस की कार्रवाई पर विवाद
उत्तर प्रदेश के बरेली और सहारनपुर में माहौल तनावपूर्ण
आज उत्तर प्रदेश के बरेली और सहारनपुर – दोनों शहरों में माहौल तनावपूर्ण रहा। वजह थी – #iLoveMuhammad ﷺ आंदोलन।
I Love Muhammad Protest के दौरान मौलाना तौकीर रज़ा का आह्वान और प्रदर्शन
बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा खान के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो कर प्रशासन को ज्ञापन देने जा रहे थे।
लेकिन यूपी पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ और हालात बिगड़ गए।
बरेली में लाठीचार्ज और गिरफ़्तारी
बरेली में कई स्थानों पर लाठीचार्ज हुआ। आरोप है कि यूपी पुलिस ने भीड़ को बलपूर्वक हटाया, वहीं पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने पत्थरबाज़ी भी की।
The Economic Times के मुताबिक, बरेली हिंसा के बाद मौलाना तौकीर रज़ा को पुलिस ने हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
सहारनपुर की घटना और पोस्टर विवाद
अब बात करते हैं सहारनपुर की। जहां जामा मस्जिद से बाहर निकल रहे एक युवक के हाथ में i love mohammad का पोस्टर था, जिसे पुलिस ने छीनकर फाड़ दिया।
जिससे पोस्टर के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मियों की नफरत साफ उजागर होती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी
वहीं लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मौलाना तौकीर रज़ा पर टिप्पणी और पिछली सरकार पर तंज़ कसते हुए कहा, 2017 के बाद हमने यूपी में कर्फ़्यू भी नहीं लगने दिया।
अब ज़रा याद कीजिये कावड़ यात्रा। कावड़ियों ने किस प्रकार यूपी में आतंक फैलाया था, उसके बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन उनके पैर दबा रही थी।
यानी कावड़िये रास्तों पर लूट-मार करें और महीनों रास्ता जाम करें तो पुलिस उनके पैर दबाती है और उन्हें मालाएं पहनाती है और अगर कोई मुसलमान साल में दो बार मुश्किल से आधे घंटे के लिए भी रास्ते पर नमाज़ पढ़े तो नमाज़ की हालत में ही उन्हें लाठियां और जूतों की लात मारी जाती है।
क्या ये इंसाफ है? जनता के सवाल
क्या ये एक लोकतान्त्रिक देश है या किसी विशेष धर्म की सत्ता? क्या ये गणतंत्र देश की पुलिस है या किसी हिन्दू संगठन की सेना?
इस I Love Muhammad Protest के दौरान बरेली पुलिस और सहारनपुर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बरेली व्हैलेन्स, बरेली प्रोटेस्ट से जुड़ी खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन और मुहब्बत-ए-रसूल का नारा लगाने वालों पर इस तरह की कार्रवाई सही है?