दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर धर्म और सत्ता का घालमेल सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी की दुर्गा पूजा समितियों और रामलीला आयोजकों से ऐसा अनुरोध किया है, जिसने न केवल सियासी हलचल मचा दी है बल्कि धार्मिक आस्थाओं के बीच नए विवाद की चिंगारी भी सुलगा दी है।
विवाद की जड़ क्या है?:- शनिवार (6 सितंबर) को सीएम रेखा गुप्ता ने दुर्गा पूजा और रामलीला समितियों के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की। इस दौरान उन्होंने कहा:
“हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिवस 17 सितंबर को है। हम चाहते हैं इस बार दिल्ली उनके जन्मदिवस को सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाए। मैं चाहती हूं कि दुर्गा पूजा पंडालों में मां दुर्गा के चरणों में मोदी जी की तस्वीर रखकर उनकी लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए आशीर्वाद लिया जाए।” सिर्फ इतना ही नहीं, रेखा गुप्ता ने समितियों को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, और विसर्जन स्थलों की सुविधा देने का भी वादा किया।
आप का तीखा वार: “12,000 रुपये में बंगाली गौरव बेचने की कोशिश” रेखा गुप्ता की इस अपील पर आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा को आड़े हाथों लिया। दिल्ली आप अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा:“क्या अब बंगाली भाई-बहनों को मां दुर्गा के साथ-साथ मोदी जी की भी पूजा करनी होगी?” “भाजपा सरकार 1,200 यूनिट मुफ्त बिजली यानी महज़ 12,000 रुपये में बंगाली गौरव और आस्था खरीदना चाहती है।”आप का आरोप है कि भाजपा धार्मिक त्योहारों का राजनीतिकरण कर रही है और आस्था को “सियासी हथियार” बना रही है।
आप के हमले के जवाब में भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा: “दिल्लीवासी जानते हैं कि कैसे केजरीवाल सरकार ने पूजा समितियों पर केजरीवाल, सिसोदिया और स्थानीय विधायकों की तस्वीरें लगाने का दबाव बनाया।” “रेखा गुप्ता ने तो सिर्फ प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करने की अपील की है। इसे मुद्दा बनाना आप की राजनीतिक अवसरवादिता है।”
भाजपा का तर्क है कि प्रधानमंत्री मोदी न केवल भारत के बल्कि पूरी दुनिया में भारत की पहचान हैं, इसलिए उनके लिए शुभकामनाएं मांगना गलत नहीं है।
असली सवाल: धर्म और राजनीति का खतरनाक मेल? यह विवाद केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि: क्या दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक उत्सवों में राजनीतिक नेताओं की तस्वीर रखना धार्मिक आस्था का अपमान नहीं है? क्या भाजपा सचमुच बंगाली वोट बैंक साधने के लिए त्योहारों को राजनीतिक हथियार बना रही है? या यह वही राजनीति है, जिसे पहले आप ने भी अपनाया था और अब भाजपा उसी रास्ते पर चल रही है?
सियासी मायने:- बंगाली समाज दिल्ली में एक बड़ा सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव रखता है। दुर्गा पूजा उनके लिए सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि पहचान और गौरव का प्रतीक है। भाजपा चाहती है कि बंगाली समाज को अपने साथ जोड़ा जाए, खासकर तब जब बंगाल की राजनीति में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने हैं। आप को लगता है कि भाजपा त्योहारों को “हिंदुत्व + राष्ट्रवाद” पैकेज बनाकर बंगालियों का दिल जीतना चाहती है।
दिल्ली में दुर्गा पंडाल अब सिर्फ पूजा-अर्चना के स्थल नहीं रह गए, बल्कि सियासी जंग के अखाड़े में तब्दील होते दिख रहे हैं। जहां एक ओर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इसे “सेवा पखवाड़ा” से जोड़ रही है, वहीं आप इसे “बंगाली गौरव की खरीद-फरोख्त” बता रही है। असली सवाल यह है कि क्या धार्मिक भावनाओं और त्योहारों की पवित्रता को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना उचित है? क्योंकि अगर यह सिलसिला बढ़ा, तो आने वाले समय में हर पंडाल, हर मंदिर और हर धार्मिक स्थल राजनीति का मंच बन जाएगा।