लातूर शहर महानगर पालिका में मुसलमानों के साथ भेद भाव और नाइंसाफी को लेकर लातूर कांग्रेस और अमित देशमुख के खिलाफ सोशल मीडिया पर हो रही टिप्पणियों और विरोध का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था कि एक और ऐसा मामला सामने आया है जिसने लातूर कांग्रेस के सांसद विधायक और जिला अध्यक्ष के प्रोगामी या सेक्युलर होने पर सिर्फ संदेह ही नहीं पैदा किया बल्कि इनकी जातीयवादी मानसिकता को भी उजागर किया है। चलिए जानते हैं मामला क्या है ? एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
मामला जुड़ा है बैरिस्टर अब्दुल रहमान अंतुले से
अब्दुल रहमान अंतुले महाराष्ट्र के आठवें मुख्यमंत्री थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता थे। मनमोहन सिंह सरकार में उन्होंने 2006 से 2009 के बीच देश के पहले केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया। वे 1962 से महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय रहे और 1962 से 1976 तक विधानसभा सदस्य रहे। इसके बाद 1976 से 1980 तक राज्यसभा सदस्य भी रहे। 2 दिसंबर 2014 को मुंबई में किडनी की बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। खास बात ये है कि लातूर को ज़िले का दर्जा उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल 1982 के दौरान दिया।
उस महान व्यक्ति का जन्म 9 फरवरी 1929 को हुआ था और उसी दिन महाराष्ट्र के एक और मजी मुख्यमंत्री रहे डॉ. शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर का भी जन्म हुआ था लिहाज़ा मुसलमानों के चहिते अमित भैय्या, अभय दादा और सांसद शिवजी काडगे इन तीनों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से डॉ. शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर को तो उनकी पैदाइश पर अभिवादन किया, अमित भय्या ने तो चंद्रपुर के समाजसेवक बाबा आमटे का भी अभिवादन किया लेकिन लातूर को जिला बनाने वाले बैरिस्टर अब्दुल रहमान अंतुले को अभिवादन करने से परहेज़ किया।
क्यूंकि ये मुसलमान थे इसलिए ? भैय्या के भक्त ये कहेंगे वो भूल गए होंगे, तो भैय्या भक्तों आपको बतादें कि कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने भय्या, दादा और सांसद तीनो को याद दिलाया कि आज बैरिस्टर अब्दुल रहमान अंतुले की भी जन्म तिथि है लेकिन फिर भी इन तीनों ने उनके लिए अभिवादन का एक छोटासा मैसेज करने की जहेमत नहीं की। इससे इनकी जातीयवादी मानसिकता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, इसके उलट धीरज देशमुख ने अपने अकाउंट से बैरिस्टर अब्दुल रहमान अंतुले के लिए अभिवादन का मैसेज पोस्ट किया है।