दोस्तों लातूर शहर महानगर पालिका के महापौर और उपमहापौर की नियुक्ति होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों के मैसेज तो बहुत कम आए लेकिन लातूर कांग्रेस और अमित देशमुख के हमेशा की तरह गलत फैसलों और और मुसलमानों के साथ नाइंसाफ़ी को लेकर टिप्पणियों और कमेंट की बारिश हो रही है-किसीने कहा तुम मुझे सिर्फ वोट दो अब्दुल्ला भाई मैं तुम्हें शतरंजी बिछाने का काम दूंगा। तो किसी ने कहा भर अब्दुल्ला वोट थैली में।
किसी ने कहा चला आता लातूरचे ईमानदार मुस्लिम समाज शतरंजय उचलायला। किसी ने अमित देशमुख के डायलॉग पर टिपण्णी करते हुए उपमहापौर की भाजपा का गमछा गले में डाली हुई तस्वीर को शियर करते हुए कहा ईमानदारी एक बड़ा महंगा शौक है। एक यूजर को सुनिए क्या कह रहे हैं बहर……। एलान के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
चलिए जानते हैं इन कमेंट और टिप्पणियों के असल कारणों को। लातूर के इतिहास में पहली बार भाजपा के उमीदवार यानी अर्चना ताई पाटिल ने 107000 वोट लिए इसकी वजह भी अमित देशमुख के गलत फैसले ही हैं अब अगर उन सब को बताया जाए तो विडिओ काफी लंबा होगा इसलिए वो सब बताना मुमकिन नहीं है लिहाज़ा इस चुनाव से पहले अमित देशमुख जो चालीस से पचास हज़ार की लीड से चुनाव जीतते थे इस बार सिर्फ 114000 वोट लेकर वो सीधे 7 हज़ार की लिड पे पहुँच गए अगर लातूर का मुस्लिम समाज सिर्फ 7 प्रतिशत अमित देशमुख के खिलाफ वोटिंग करता तो… लातूर के 90. 9 परसेंटेज मुसलमानों ने अमित देशमुख को वोट दिया है।
और यही हाल लातूर शहर महानगर पालिका के चुनाव में भी था जिसकी वजह से कांग्रेस और वंचित को 46 सीटें मिली। लातूर एक मुस्लिम बहुल शहर है फिर कांग्रेस और अमित देशमुख के प्रति मुसलमानों की वफादारी और ईमानदारी के मद्दे नज़र यह अनुमान था की महापौर के पद पे किसी मुस्लिम को बिठाया जाएगा लेकिन आरक्षण के चलते ये पद एससी महिला को दिया गया फिर मुसलमानों ने सोचा कि चलो कम से कम उपमहापौर तो मुस्लिम ही होगा लेकिन कांग्रेस और अमित देशमुख ने उपमहापौर ऐसे व्यक्ति को बनाया जो पहले भाजपा में था।
याद रहे कि पहले कांग्रेस का शहर अध्यक्ष हमेशा मुस्लिम हुआ करता था वो पद इन्होने मुस्लिम समाज से छीन लिया। मांजरा पे और विकास बैंक पे पहले एक -एक मुस्लिम हुआ करता था उन्हें भी हटा दिया गया आज ज़िले भर में इनके किसी कारखाने बैंकों और संस्थाओं पे मुस्लिम नहीं हैं इतना ही नहीं इनके किसी कारखाने ,बैंक और संस्थाओं पर नौकरियों में भी मुस्लिम नहीं हैं फिर भी पूरा मुस्लिम समाज एकतरफा इनके प्यार में पागल है खैर कांग्रेस और अमित देशमुख के इसी गलत फैसले के कारण सोशल मीडिया पर कांग्रेस और अमित देशमुख के खिलाफ टिप्पणियां हो रही हैं।
अब देखना ये है कि कांग्रेस और अमित देशमुख बाकी पदों का बटवारा और किस समाज को खुश करने के लिए करते हैं अगर लातूर कांग्रेस और अमित देशमुख अब भी अपने गलत फैसलों से बाज़ नहीं आए तो आगे क्या होगा ये तो वक़्त ही बताएगा।